Sunday, 26 August 2018

3 June 2018, Page No.15, Punjab kesari

नहीं उड़ सकेगा दिल्ली की उम्मीदों का हेलीकॉप्टर

अब भी गुमनाम है लोहारहेड़ी की बावली



द्वारका सबसिटी के ऊंची इमारतों के बीच एक गुमनाम घरोहर भी मौजूद है। जिसे द्वारका की बावली या लोहारहेड़ी की बावली के मान से जाना जाता है। इसकी खुदाई कुछ साल पहले ही की गई है। खुदाई के दौरान इसके लोदी काल में बने होने के प्रमाण मिले थे। उल्लेखनीय है कि जफर हसन नाम के इतिहासकार की इतिहास से संबंधित किताब में भी द्वारका बावली (तत्कालीन लोहारहेड़ी बावली) के लोदी काल में ही हुए निर्माण का जिक्र है। 

कहा जा रहा है कि गुमनाम दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक द्वारका बावली (बावड़ी) एक बार फिर पानी से लबालब नजर आएगी। राज्य पुरातत्व विभाग इस बावड़ी में जल्द वाटर कंजरवेशन की व्यवस्था करने जा रहा है, ताकि आसपास के इलाकों से बारिश का पानी बावड़ी में इक_ा हो। यदि ऐसा होता है तो द्वारकावासियों समेत दिल्लीवालों को सुकून भरा एक प्राकृतिक स्थल के अलावा एक पिकनिक स्पॉट मिल जाएगा। राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार द्वारका बावली में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जाएगी। इस परियोजना के तहत बारिश के दौरान आसपास के इलाकों में गिरने वाला पानी बावड़ी में इक_ा किया जाएगा, ताकि बावड़ी का पुराना स्वरूप लौटे। इसके अलावा इस योजना से दिनों-दिन गिर रहे भूजल स्तर में भी सुधार होगा जिससे आसपास के इलाकों का जलस्तर सुधारेगा।


45 वर्ष पहले पानी से भरी थी बावली
खुदाई के दौरान मिली जानकारी के अनुसार द्वारका बावली लगभग 40 साल पहले तक पानी से भरी रहती थी। लेकिन समय के साथ पानी का यह स्रोत सुखता चला गया। द्वारका बसने के बाद जानकारी के अभाव में गंगोत्री अपार्टमेंट से सटे होने के कारण यह कूड़ास्थल में तब्दील होता गया। आस-पास के लोगों का कहना है कि खुदाई से पूर्व इस ऐतिहासिक बावली के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।


बावली की परिभाषा
सदियों पहले पानी की आपूर्ति के लिए कुएं की तर्ज पर बावली का निर्माण किया जाता था। इनमें सीढिय़ां बनी होती हैं और प्राकृतिक स्रोत के जरिए बावली में नीचे से ऊपर की ओर पानी आता है। जिससे लोगों को पेयजल की प्राप्ति होती थी।

क्या थी स्थिति
द्वारका स्थित बावली की खोज साल 2011 में राज्य पुरात्तव विभाग द्वारा की गई थी। जिसे तत्कालीन समय में लोहारहेड़ी बावली के नाम से जाना जाता था। खोज के समय यह एक निजी स्कूल और आवासीय परिसर के पास एक खाली भूखंड पर स्थित था और सघन झाडिय़ों व घने पत्तों ढक़ा एक छोटे से गड्ढ़े की तरह दिखाई देता था। जिसे राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा उत्खनन व संरक्षण करने के लिए इंडियन नेशनल ट्रस्ट फोर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) को सौंपा था।

क्या है वर्तमान स्थिति
आज के समय में बावली दिल्ली पुरातत्व कानून के तहत संरक्षण व सहेजने के लिए सरकार द्वारा पहचाने गए 15 स्मारकों में से एक है। यहां पर लगभग 30 फुट की खुदाई की जा चुकी है। अब धनुषाकार माध्यम से जुड़े दो मंजिलों को साफ तौर पर देखा जा सकता है। दोनों ओर की दीवारों पर उभरे मेहराबों से इसके लोधी काल में बने होने के संकेत मिल रहे हैं। यह एक अपने आप में खास तरह की संरचना है क्योंकि राजधानी में इस तरह की दूसरी कोई संरचना नहीं है। फिलहाल इसकी चारदीवारी भी करा दी गई है। बाहर लगे बोर्ड के मुताबिक इसका क्षेत्रफल 377 स्क्वायर मीटर है।



साभारः पंजाब केसरी
राजेश रंजन सिंह



‘Rafta Rafta’ of Yamla Pagla Deewana Phir Se launched

The upcoming action comedy film Yamla Pagla Deewana Phir Se releases its latest peppy song “Rafta Rafta” touching million of hearts. Therefore, star cast of the film Dharmendra, Sunny Deol, Bobby Deol and Kriti Kharbanda arrived in Delhi to launch the promotional song and interacted with media in PVR Plaza, Connaught Place.

   The song has already got millions of likes and views on social media. Many iconic stars like Shatrughan Sinha, Rekha, Salman Khan and Sonakshi Sinha were also seen in the song shaking leg. Being in limelight with Media, Dharmendra said, “This time we came up with the part third of the film series and this is a total entertainment film. We have kept all the elements in our mind while making this film. We have tried our best for this project.”
   Well, the song begins with quirky and spooky moves of Salman and Dharmendra like never before and goes on entertaining us. While, sharing the experience Bobby said, “Our family shares most of the time together during shoots. We really enjoyed a lot shooting the song and had a fun experience with Salman, Rekha and Sonakshi. We are really excited for the film and looking forward for the response.”
 
 The upcoming film is the third installment to the Yamla Pagla Deewana series which is directed by Navaniat Singh and produced by Kamayani Punia Sharma and Aarushi Malhotra. Featured under the banner of Sunny Sounds Pvt. Ltd., Intercut Entertainment, Pen India Limited, the movie is set to release on 31st August.

'Aao Kabhi Havelli Pe' in launched

Kriti Sanon who is seen shaking a leg with Rajkummar Rao and Badshah in the peppy number 'Aao Kabhi Haveli Pe' arrived in Delhi to launch the promotional song alongside lead actor Rajkummar Rao and producer Dinesh Vijan. 


The song features Badshah rapping to the tunes of Sachin Jigar. It has been sung by Nikita Gandhi and Sachin- Jigar. The song shows Kriti trying to lure Rajkummar Rao and the other men into her haveli. 


The famous meme "Aao Kabhi Haveli Pe" where the men are calling women to them has been redefined by the makers in the song where Kriti will be inviting men to her haveli.

Tuesday, 1 May 2018

अंबेडकर और उनकी यादों का म्यूजियम


दिल्ली ही नहीं बल्कि देश में यह पहली ऐसी इमारत है जिसे एक खुली किताब (ज्ञान के द्वारा सशक्तिकरण) के रूप में ढाला गया है। यह इमारत है अंबेडकर म्यूजियम जोकि संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की यादों को संजोने के लिए बनाया गया है। दिल्ली की आइकनिक बिल्डिंग के तौर पर बनाया गया है यह अंबेडकर म्यूजियम। यहां पर आप बाबा साहेब को लाइव भाषण देने के साथ-साथ उनसे संबंधित हर चीज को देख ही नहीं बल्कि सुन भी सकते हैं, महसूस कर सकते हैं। संविधान को लाइव पढ़ भी सकते हैं। यहां आकर आप बाबा साहेब के जमाने को बखूबी फील कर सकते हैं। बता दें कि 26 अलीपुर रोड स्थित भवन में बाबा साहेब अंबेडकर ने 1 नवंबर 1951 से लेकर अपने महापरिनिर्वाण 6 दिसंबर 1956 तक निवास किया था। दरअसल, यह संपत्ति राजस्थान के सिरोही के महाराज की थी। बाबा साहेब के 1951 में केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा देने के बाद उन्हें यहां पर रहने के लिए आमंत्रित किया गया था। अब यह भारत सरकार की संपत्ति है। अब यहीं पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने डॉ. अंबेडकर नेशनल मैमोरियल तैयार किया है। इसकी आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मार्च 2016 को रखी थी और इसका उद्घाटन भी मोदी ने ही 14 अप्रैल 2018 को किया।

अंबेडकर लाइव
इस म्यूजियम की खासियत इसका जीवंत होना है। यहां हर चीज इस सलीके से रखी गई है कि देखने वाले को बनावटी न लगे बल्कि ऐसा महसूस हो कि उसके सामने ही सारी घटनाएं घटित हो रही हैं। यहां आकर आप अंबेडकर का लाइव भाषण भी सुन सकते हैं। अंबेडकर के इस रोबोटिक पुतले (एनिमेट्रॉनिक्स) को अमेरिका से एक करोड़ की लागत से लाया गया है। म्यूजियम में डिजीटल इंडिया की झलक साफ देखी जा सकती है। यहां कुल 22 प्रोजेक्टर लगाए गए हैं।

पढ़ें डिजीटल संविधान 
इस म्यूजियम में संविधान की मूल प्रतियों को रखा गया है। साथ ही संविधान के एक-एक पन्ने का डिजीटल पेज भी तैयार किया गया जिसे दर्शक बखूबी पढ़ व सुन भी सकते हैं। वहीं, संविधान के मुख्य पेजों को बड़े आकार में डिस्प्ले किया गया है। इसके अलावा यहां पर सदस्यों को संविधान सौंपते व हस्ताक्षर करते हुए पुतले भी लगाए गए हैं। यहां पर संकल्प भूमि के नीचे अंबेडकर को बैठे दर्शाया गया है। कहा जाता है कि अंबेडकर पहले बड़ौदा के महाराज सायाजी राव गायकवाड के यहां काम करते थे। लेकिन उनके पास घर नहीं था और एक दिन उन्हें निकाल दिया गया। जिसके बाद वह एक पेड़ के नीचे बैठे और संकल्प लिया कि वह देश से जात-पात का अंतर खत्म करेंगे।

पंच तीर्थ और अंबेडकर म्यूजियम
जानकारी के मुताबिक यह पूरा प्लान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था। उन्होंने ही अंंबेडकर से जुड़े पंच तीर्थों को एक म्यूजियम में समाहित करने की परिकल्पना को मूर्त रूप देने की पहल की थी। बता दें कि अंबेडकर की जन्मभूमि  (मऊ, मध्य प्रदेश), शिक्षा भूमि (लंदन), दीक्षा भूमि (नागपुर, महाराष्ट्र), महापरिनिर्वाण भूमि (अलीपुर रोड़, दिल्ली) और चैत्य भूमि (दादर, महाराष्ट्र जहां अंतिम संस्कार हुआ) को पंच तीर्थ नाम प्रधानमंत्री मोदी ने दिया था। इस म्यूजियम को विकसित करने का मकसद भी यही था कि पांचों तीर्थों का सुख एक जगह मिले।

म्यूजियम के डायरेक्टर डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि इस म्यूजियम में अंबेडकर के अध्ययन कक्ष को भी डिस्प्ले किया गया है। यहां पर किताबों का ऑरिजिनल कलेक्शन रखा गया है। एक मेडिटेशन हॉल भी तैयार किया गया है जिसमें वियतनामी मार्बल की मूर्ति को जयपुर के आर्टिस्ट ने महात्मा बुद्ध की प्रतिमा में ढाला है। इसके अलावा यहां आप ओबामा, जवाहर लाल नेहरू और मोदी के उन बयानों को सुन सकते हैं जो अंबेडकर के विषय में दिए गए थे। 

-राजेश रंजन सिंह 

Wednesday, 14 March 2018

Jasmohan Singh takes over as Chairman of CII Haryana State Council



Anuj Munjal becomes Vice Chairman of CII Haryana State Council

Mr Jasmohan Singh, Managing Director, Frick India Ltd, and Mr Anuj MunjalExecutive Director, Munjal Auto Industries Ltd have been elected as the Chairman and Vice Chairman respectively of CII Haryana State Council, for the year 2018 – 19, states a release from Confederation of Indian Industry (CII).
The new Chairman, Mr Jasmohan Singh is a B.Tech in Electrical Engineering from the USA with a specialized course in Computer Engineering. He heads operations in manufacturing and sales within as well as outside India of Industrial Refrigeration & Central Air conditioning equipment in his organisation. He has also served as the Vice-Chairman of India-USA Foundation for Industrial and Technology Collaboration.
The new Vice-Chairman, Mr Anuj Munjal is an MBA in Finance & Marketing. He has more than 20 years of experience in manufacturing. Over the years, Mr Munjal has prudently used his skills in finance, marketing, human relations and operations to deliver results in every sphere of the organisation. Mr Munjal has overseen the setting up of three new manufacturing facilities, added new customers, and has driven the company towards achieving its set standard
s and goals.