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Tuesday, 1 May 2018

अंबेडकर और उनकी यादों का म्यूजियम


दिल्ली ही नहीं बल्कि देश में यह पहली ऐसी इमारत है जिसे एक खुली किताब (ज्ञान के द्वारा सशक्तिकरण) के रूप में ढाला गया है। यह इमारत है अंबेडकर म्यूजियम जोकि संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की यादों को संजोने के लिए बनाया गया है। दिल्ली की आइकनिक बिल्डिंग के तौर पर बनाया गया है यह अंबेडकर म्यूजियम। यहां पर आप बाबा साहेब को लाइव भाषण देने के साथ-साथ उनसे संबंधित हर चीज को देख ही नहीं बल्कि सुन भी सकते हैं, महसूस कर सकते हैं। संविधान को लाइव पढ़ भी सकते हैं। यहां आकर आप बाबा साहेब के जमाने को बखूबी फील कर सकते हैं। बता दें कि 26 अलीपुर रोड स्थित भवन में बाबा साहेब अंबेडकर ने 1 नवंबर 1951 से लेकर अपने महापरिनिर्वाण 6 दिसंबर 1956 तक निवास किया था। दरअसल, यह संपत्ति राजस्थान के सिरोही के महाराज की थी। बाबा साहेब के 1951 में केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा देने के बाद उन्हें यहां पर रहने के लिए आमंत्रित किया गया था। अब यह भारत सरकार की संपत्ति है। अब यहीं पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने डॉ. अंबेडकर नेशनल मैमोरियल तैयार किया है। इसकी आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मार्च 2016 को रखी थी और इसका उद्घाटन भी मोदी ने ही 14 अप्रैल 2018 को किया।

अंबेडकर लाइव
इस म्यूजियम की खासियत इसका जीवंत होना है। यहां हर चीज इस सलीके से रखी गई है कि देखने वाले को बनावटी न लगे बल्कि ऐसा महसूस हो कि उसके सामने ही सारी घटनाएं घटित हो रही हैं। यहां आकर आप अंबेडकर का लाइव भाषण भी सुन सकते हैं। अंबेडकर के इस रोबोटिक पुतले (एनिमेट्रॉनिक्स) को अमेरिका से एक करोड़ की लागत से लाया गया है। म्यूजियम में डिजीटल इंडिया की झलक साफ देखी जा सकती है। यहां कुल 22 प्रोजेक्टर लगाए गए हैं।

पढ़ें डिजीटल संविधान 
इस म्यूजियम में संविधान की मूल प्रतियों को रखा गया है। साथ ही संविधान के एक-एक पन्ने का डिजीटल पेज भी तैयार किया गया जिसे दर्शक बखूबी पढ़ व सुन भी सकते हैं। वहीं, संविधान के मुख्य पेजों को बड़े आकार में डिस्प्ले किया गया है। इसके अलावा यहां पर सदस्यों को संविधान सौंपते व हस्ताक्षर करते हुए पुतले भी लगाए गए हैं। यहां पर संकल्प भूमि के नीचे अंबेडकर को बैठे दर्शाया गया है। कहा जाता है कि अंबेडकर पहले बड़ौदा के महाराज सायाजी राव गायकवाड के यहां काम करते थे। लेकिन उनके पास घर नहीं था और एक दिन उन्हें निकाल दिया गया। जिसके बाद वह एक पेड़ के नीचे बैठे और संकल्प लिया कि वह देश से जात-पात का अंतर खत्म करेंगे।

पंच तीर्थ और अंबेडकर म्यूजियम
जानकारी के मुताबिक यह पूरा प्लान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था। उन्होंने ही अंंबेडकर से जुड़े पंच तीर्थों को एक म्यूजियम में समाहित करने की परिकल्पना को मूर्त रूप देने की पहल की थी। बता दें कि अंबेडकर की जन्मभूमि  (मऊ, मध्य प्रदेश), शिक्षा भूमि (लंदन), दीक्षा भूमि (नागपुर, महाराष्ट्र), महापरिनिर्वाण भूमि (अलीपुर रोड़, दिल्ली) और चैत्य भूमि (दादर, महाराष्ट्र जहां अंतिम संस्कार हुआ) को पंच तीर्थ नाम प्रधानमंत्री मोदी ने दिया था। इस म्यूजियम को विकसित करने का मकसद भी यही था कि पांचों तीर्थों का सुख एक जगह मिले।

म्यूजियम के डायरेक्टर डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि इस म्यूजियम में अंबेडकर के अध्ययन कक्ष को भी डिस्प्ले किया गया है। यहां पर किताबों का ऑरिजिनल कलेक्शन रखा गया है। एक मेडिटेशन हॉल भी तैयार किया गया है जिसमें वियतनामी मार्बल की मूर्ति को जयपुर के आर्टिस्ट ने महात्मा बुद्ध की प्रतिमा में ढाला है। इसके अलावा यहां आप ओबामा, जवाहर लाल नेहरू और मोदी के उन बयानों को सुन सकते हैं जो अंबेडकर के विषय में दिए गए थे। 

-राजेश रंजन सिंह 

Friday, 23 February 2018

मोदी की मूर्ति से गुलजार होगा अंबेडकर म्यूजियम


सीपीडब्ल्यूडी ने मंत्रालय को मूर्ति फाइनल करने के लिए भेजा प्रस्ताव

लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मूर्ति अब अंबेडकर म्यूजियम में लगाने की तैयारी चल रही है। यहां पर प्रधानमंत्री मोदी की मूर्ति अब संविधान निमार्ताओं के साथ दिखेगी। इसके लिए पूरा खाका तैयार किया जा चुका है। प्रधानमंत्री की मूर्ति से संबंधित पुतलों की मुद्राओं को फाइनल करने के लिए सीपीडब्ल्यूडी ने सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय को पुतलों की लिस्ट भेजी है। मूर्ति लगाने के लिए अब सिर्फ मंत्रालय से हरि झंडी का इंतजार है।
साथ ही दूसरी तरफ यह सवाल उठने लगा है कि मोदी की मूर्ति अंबेडकर मैमोरियल में आखिर क्यों लगाई जा रही है? विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी की मूर्ति लगाने का आखिर क्या औचित्य है? सूत्र बताते हैं कि यहां पर उन लोगों की मूर्तियां लगाई जानी हैं, जो सन् 1949 में संविधान निर्माता बाबा साहेब के साथ संविधान पारित कराते समय सभा के सदस्य थे।
बता दें कि राजधानी में बाबा साहेब को लेकर एक म्यूजियम तैयार किया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य लगभग खत्म होने वाला है और फिलहाल इसे फाइनल टच दिया जा रहा है। यहां पर सात लोगों की प्रतिमाएं लगाने की योजना है। सात लोगों में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल, रक्षामंत्री बलदेव सिंह, श्रममंत्री बाबू जगजीवन राम, स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर, शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम व वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम शामिल है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उस दौरान थे नहीं फिर उनकी मूर्ति लगाए जाने का क्या औचित्य है?
फाइनल करने के लिए तीन मुद्राएं 
'पंजाब केसरी' को मिले दस्तावेजों के मुताबिक सीपीडब्ल्यूडी के विकास परियोजना मंडल-2 की ओर से मंत्रालय को प्रधानमंत्री मोदी की तीन मुद्राओं को भेजा गया है। इसमें एक को फाइनल किया जाना है। इसके फाइनल होते ही अगले 15 दिनों के भीतर म्यूजिम में मोदी की मूर्ति को स्थापित कर दिया जाएगा।
मोदी ने ही रखी थी म्यूजियम की आधारशिला
दिल्ली में 26 अलीपुर रोड स्थित भवन में बाबा साहेब अंबेडकर ने 1 नवंबर 1951 से लेकर अपने महापरिनिर्वाण 6 दिसंबर 1956 तक निवास किया था। दरअसल, यह संपत्ति राजस्थान के सिरोही के महाराज की थी। बाबा साहेब के 1951 में केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा देने के बाद उन्हें यहां पर रहने के लिए आमंत्रित किया गया था। अब यह भारत सरकार की संपत्ति है। अब यहीं पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, डॉ. अंबेडकर नेशनल मैमोरियल स्थापित कर रहा है। जिसकी आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही 21 मार्च 2016 को रखी थी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस मैमोरियल की बिल्डिंग दिल्ली की आइकॉनिक बिल्डिंग बनेगी। साथ ही यह भी कहा था कि बाबा साहेब के जन्मदिवस पर 14 अप्रैल 2018 को वह इसका उद्घाटन करेंगे। तो ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजिमी है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी खुद ही अपनी मूर्ति का भी अनावरण करेंगे?


मायावती के बाद मोदी बनेंगे दूसरे जिंदा नेता
जिंदा नेताओं की मूर्ति लगवाने की फेहरिस्त में प्रधानमंत्री मोदी का नाम शामिल होने जा रहा है। इससे पहले उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी मूर्ति लगवाई थी। जोकि सियासी गलियारों से लेकर आम जन के बीच खासी चर्चा का विषय बना था। उस समय सभी बड़ी पार्टियों ने इसकी खूब निंदा की थी। एक बार फिर इतिहास दोहराया जा रहा है। सरकार के मतहात विभाग के चंद लोगों ने मोदी को महिमा मंडित करने के लिए ही प्रधानमंत्री की मूर्ति लगाने लगाने की योजना बना डाली है। सूत्रों की मानें तो अभी तक प्रधानमंत्री व पीएमओ को इस संदर्भ में अवगत नहीं कराया गया है। हालांकि पार्टी के आला अधिकारियों को भी इसकी जानकारी होने की बात कही जा रही है।







-राजेश रंजन सिंह
साभार: पंजाब केसरी

Sunday, 11 February 2018

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखी एग्जाम वॉरियर्स



cover page


एग्जाम वॉरियर्स  बच्चों और युवाओं के लिए लिखी प्रेरणादायक पुस्तक है। मजेदार शैली में बातचीत करते लिखी गई इस किताब बच्चों की अच्छी दोस्त है। बच्चे इसमें इलेस्ट्रेशन, एक्टिवटीज और योगाभ्यास की मुद्राएं भी देख सकेंगे। यह किताब बच्चों की अच्छी दोस्त है। इस किताब में दिए गए टिप्स से परीक्षाओं के दौरान बच्चों को मुस्कराने और खुश रहने में मदद मिलेगी। इस किताब में बच्चों को समझाया गया है कि परीक्षाओं को एक उत्सव की तरह लेना चाहिए। त्योहार में जैसा माहौल होता है, बच्चों को परीक्षा के दौरान उसी प्रसन्नता, जोश उमंग और उत्साह से सीखने का जश्न मनाना चाहिए।
यह किताब तनाव मुक्त परीक्षाओं के महत्व के इर्द-गिर्द वाद-विवाद और चर्चा को बढ़ावा देती है। यह किताब परीक्षाओं में मिलने वाले नंबरों से ज्यादा ज्ञान पर ध्यान केंद्रित करती है। यह पुस्तक उत्प्रेरक बनने का उद्देश्य पूरी करती है, जिससे परीक्षाओं में होने वाले तनाव से बच्चों को निजात दिलाने पर सभी कोणों से विचार-विमर्श को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल हमारे एग्जाम वॉरियर्स  (परीक्षा देने वाले बच्चों) को लाभ होगा, बल्कि इससे समग्र रूप से हमारे पूरे समाज को इससे फायदा होगा, जिसमें अध्यापक, माता-पिता और पूरा समाज शामिल हैं। बच्चों के साथ बातचीत की शैली को बढ़ावा देते हुए पुस्तक में मजेदार ढंग से ऐसी बातें बताई गई है, जो उन्हें परीक्षाओं से होने वाले बेवजह के तनाव से मुक्ति की दिशा में सोचने को मजबूर करेंगी। इस किताब में छात्रों को परीक्षाओं के तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए कई आसान और प्राणायाम को भी शामिल किया गया है।
यह किताब व्यावाहरिक है। बच्चों को कोई उपदेश नहीं देती, लेकिन यह हमें परीक्षाओं में होने वाले तनाव के मुद्दे पर सोचने को प्रेरित करती है। एग्जाम वॉरियर्स  भारत और दुनिया भर के स्टूडेंट के लिए बहुत अच्छी गाइड है। ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन इस किताब के लिए टेक्नोलॉजी और नॉलेज पाटर्नर है।
इस किताब को एक कार्यक्रम में 3 फरवरी 2018 को केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने रिलीज किया।

लेखक के बारे में
नरेंद्र मोदी विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के प्रधानमंत्री हैं। वह मई 2014 से भारत के प्रधानमंत्री हैं। पिछले तीन दशकों में संसद में पहली बार पूर्ण बहुमत लेकर मोदी इस समय केंद्र सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। मोदी की जीत में देश के युवाओं के ऐतिहासिक समर्थन का सबसे बड़ा योगदान रहा है। खासतौर से पहली बार वोटर बने लड़के-लड़कियों ने अपना बहुमूल्य वोट उनकी पार्टी को ही दिया था। 

प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने आर्थिक और सामाजिक सेक्टर में रिफॉर्म के लिए बदलाव के कई कदम उठाए, जिससे देश के विकास यात्रा को मजबूती से बढ़ावा मिला।
 शिक्षा का क्षेत्र मोदी के दिल के काफी नजदीक है। वह युवाओं को प्रेरणा प्रदान करने वाले नेता हैं। उनका मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात देश के सभी वर्गों के लोगों में काफी लोकप्रिय है। अपने इसी प्रोग्राम में उन्होंने एग्जाम वॉरियर्स  पर पहले 2015 में बात की। इसके बाद उन्होंने 2016 और 2017 में भी इस मुद्दे को उठाया।
इससे पहले मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में कई संगठनात्मक जिम्मेदारियों को कुशलता से अंजाम दिया। वह बीजेपी संगठन के महासचिव भी रह चुके हैं। मोदी को लिखना, पढ़ना और लोगों से बातचीत करना काफी पसंद है। वह सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले नेताओं में से एक हैं। सोशल मीडिया का मोदी नियमित तौर पर इस्तेमाल करते हैं। वह अपने ऐप, नरेंद्र मोदी मोबाइल ऐप से दुनिया भर के लोगों से जुड़े रहते हैं।

Friday, 2 February 2018

किसानों ने बजट को बताया जुमला


मंडी के आढ़तियों ने कहा, योजना लागू करना होगा टेढ़ी खीर

मोदी सरकार के अंतिम फुल बजट में किसानों और मंडी को लेकर ढ़ेर सारी घोषणाएं की गई हैं। सरकार ने कृषि मंडी व्यवस्था में सुधार के लिए 2,000 करोड़ रुपए के कोष की व्यवस्था की घोषणा की है। जिससे अव्यवस्थाओं से बदहाल देश की मंडियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वहीं, बजट में ग्रामीण कृषि बाजारों का विकास करने की भी घोषणा के साथ ही वित्त मंत्री अरूण जेटली ने ऐलान किया कि देश भर में किसानों के लिए ई-नैम ग्रामीण बाजार बनाए जाएंगे। इसका मकसद किसानों को भी डिजिटल बनाना है। इन विषयों पर दिल्ली देहात के किसानों व एशिया की सबसे बड़ी मंडियों में शुमार आजादपुर मंडी के आढ़तियों ने इस बजट को पूरी तरह से जुमला करार दिया है। किसानों का कहना है कि नीतियां व योजनाएं वातानुकुलित कमरों मे बैठकर बनाई जाती हैं। इसलिए बजट का जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना ही नहीं है।



लोगों की प्रतिक्रियाएं
बजट में सरकारी घोषणाएं हमेशा ही अच्छी होती हैं। इस बार के बजट में भी वादे तो कर दिए गए लेकिन उन घोषणाओं पर कितना अमल होता है, यह जल्द पता लगेगा।
बजट में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सरकार को चाहिए था कि वह खेतों में जाकर खेतों में काम कर रहे किसानों व बटाईदारों के अनुभवों को जानते। इसी आधार पर लागत का आंकलन कर बजट में किसानों के लिए बातें करते। बिचौलियों से मिलकर खानापूर्ति करके फर्जी आंकलन कर  लागत व भाव तय कर लिए गए। बिजली, पानी , खाद, बीज की समय पर उपलब्धता व अनुकूल- प्रतिकूल मौसम फसल की पैदावार व गुणवत्ता तय करती है। एक-एक दिन व एक एक किलोमीटर पर यह बदलाव देखने को मिलता है। लेकिन इनकी अनदेखी की गई।
सुरेश कुमार छिल्लर, अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन दिल्ली प्रदेश 

आम बजट मे किसानों के बारे में की गई घोषणाएं व स्वामीनाथन आयोग का जिक्र करके किसानों को लुभाने का प्रयास किया गया है। कुल मिलाकर यह लोकलुभावन जुमला प्रतीत होता है। अब तक सरकारें चाहे किसी भी दल की रही हों किसान मजदूरों व छोटे दुकानदारों का भला नहीं कर पाई हैं। इसका कारण यह है कि इनके लिए नीतियां व योजनाएं बनाने वाले वातानुकुलित कमरों मे बैठकर व फर्जी आंकडो को आधार बनाकर आंकड़ेंबाज नीतियां व योजनाएं बनाते हैं। जिस दिन धरातलीय किसान नीतियां व योजनाएं बनाने मे साझीदार होने लगेंगे, उस दिन से किसानों, मजदूरों व छोटे दुकानदारों का भला होना शुरू हो जाएगा।
बिजेन्द्र, कोटला, दिल्ली 

बजट में आलू, प्याज और टमाटर के दामों में उतार-चढ़ाव की समस्या से निपटने के लिए बेशक ऑपरेशन ग्रीन लॉन्च किया गया है। लेकिन इस ऑपरेशन का इस पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार को दूसरे उपायों पर विचार करना चाहिए था।
राजीव, टमाटर आढ़ती, आजदपुर मंडी

हर साल बजट में घोषणाएं ही की जाती हैं। इसका सीधा असर तो कभी नहीं दिखता। मंडी व्यापारियों को बजट से कभी कोई फायदा नहीं होता।
भगत, आलू व्यापारी, आजादपुर मंडी


साभार: पंजाब केसरी

Thursday, 1 February 2018

कुछ टैक्स ऐसे भी



कंजेशन टैक्स
दिल्ली में यह अजीबो-गरीब तरह का टैक्स 1 अप्रैल 2012 से लगने वाला था, जिसमें भीड़ वाली जगहों पर पीक आवर्स में निजी गाड़ी ले जाने पर तय शुल्क देना पड़ता। हालांकि इस तरह के टैक्स पर एक राय नहीं बनी और इसे आगे के लिए विचाराधीन रखा गया। हालांकि आपको बता दें कि लंदन और मिलान में कंजेशन टैक्स लगा हुआ है।


यूरिन टैक्स
रोमन के राजा वेस्पेशन ने पब्लिक यूरिनल पर टैक्स की व्यवस्था की। इतना ही नहीं इंडस्ट्री में यूज के लिए यूरिन की सेल से भी रिवेन्यू कलेक्ट करने की व्यवस्था की गई थी। जब उनके बेटे टाइटस ने इस पॉलिसी पर सवाल उठाया तो वेस्पेशन ने उसके नाक पर एक सिक्का लगा दिया और उससे कहा, मनी डज नॉट स्टिंक- पैसों से दुर्गंध नहीं आती।

सोल टैक्स 
इंग्लैंड के हैनरी आठवें, उनकी बेटी एलिज़ाबेथ प्रथम और रूस के पीटर द ग्रेट ने दाढ़ी पर टैक्स लगाया था। वहीं विलियम तीसरे ने खिड़कियों पर टैक्स लगाया था। हेनरी प्रथम ने उन लोगों पर टैक्स लगाया था, जो इंग्लैंड के लिए लडऩा और मरना नहीं चाहते थे। पीटर द ग्रेट ने सोल टैक्स यानी आत्मा पर कर वसूलने की व्यवस्था उन लोगों से की थी, जो यह यकीन करते थे कि उनके पास आत्मा जैसी कोई चीज़ है। हालांकि, जो लोग कहते हैं कि उनका आत्मा में विश्वास नहीं है, उनपर धर्म में आस्था न रखने का टैक्स लिया जाता था।

हार्ड लेबर
इजिप्ट में टैक्स का मतलब लेबर(मेहनत) था। कुछ एक लाख लोगों का कहना था कि उन्होंने 20 साल तक पिरामिड के लिए मेहनत की है। अफवाह यह उड़ी कि फैरओह ने इस प्रॉजेक्ट के फाइनैंस को संभालने के लिए अपनी बेटी को प्रॉस्टिट्यूशन के काम में लगाया। बताया जाता है कि वह अपनी फी में अपने पिरामिड के लिए हर कस्टमर से स्टोन का एक्स्ट्रा ब्लॉक चार्ज करती थी।

बैचलर टैक्स
जूलियस सीजऱ ने, इंग्लैंड में 1695 में, पीटर द ग्रेट ने बैचलर टैक्स को 1702 में लागू किया। मुसोलिनी ने भी सन् 1924 में 21 वर्ष से लेकर 50 वर्ष की आयु के बीच अविवाहित पुरुषों पर बैचलर टैक्स लगाया। इन बैचलर्स को बिना कपड़ों के बाजार में अपना ही मजाक उड़ाते हुए घूमना पड़ता था।

ब्रेस्ट टैक्स
क्या कभी आपने ब्रेस्ट टैक्स के बारे में सुना है? इतिहास में ऐसा भी हुआ है। टैक्स कलेक्टर्स ब्रेस्ट माप कर उसी के अनुसार टैक्स वसूलते थे, जिससे परेशान होकर एक युवती ने अपना ब्रेस्ट काटकर टैक्स कलेक्टर के हाथ में ही दे दिया था।

फ्यूनरल टैक्स
यूएस की एक महिला बिल्कुल पागल सी हो गईं, जब उनके 19 साल के बेटे ने सूइसाइड कर लिया। लेकिन, उनके लिए यह तब और भी शॉकिंग हो गया, जब उन्हें पता चला कि लोकल रूल्स के मुताबिक फ्यूनरल के लिए उन्हें 900 डॉलर देने होंगे।

पोल टैक्स
एक साल टेक्सास में स्ट्रिप क्लब (जहां पोल डांस होता है) जाने वाले हर कस्टमर से 5 डॉलर वसूले गए।

टैटू टैक्स 
ऑरकैंसस में अगर कोई टैटू, बॉडी पियर्सिंग या इलेक्ट्रोलीसिस ट्रीटमेंट करवाता है तो उसे स्टेट को सेल्स टैक्स के तहत 6 प्रतिशत टैक्स देना होता है।

हेड टैक्स फॉर चाइनीज़
20वीं सदी की शुरुआत में कनाडा में आने वाले हर चीनी पर हेड टैक्स लगाया जाने लगा। न्यू ज़ीलैंड में भी इसके लिए कुछ इसी तरह के टैक्स की व्यवस्था की गई। बाद में दोनों ही देशों ने इस तरह के रेसिस्ट टैक्स की लिए माफी मांगा।


फैट टैक्स
खाने में फैट की मात्रा के हिसाब से टैक्स! यह सुनकर आपको थोड़ा अजीब तो लगेगा, लेकिन है यह सच। दरअसल, डेन्मार्क और हंगरी जैसे देशों ने चीज, बटर और पेस्ट्री जैसे हाई कैलरीज फूड पर फैट टैक्स लगाया हुआ है। इस टैक्स के दायरे में वे सभी चीजें आती हैं, जिनमें 2.3 परसेंट से ज्यादा सेचुरेटेड फैट है। हंगरी और डेनमार्क जैसे देशों में हाल ही में यह टैक्स लगाया गया है।

सेक्स टैक्स
हालांकि प्रॉस्टिट्यूशन जर्मनी में लीगल है, लेकिन इसके लिए यहां सेक्स टैक्स जैसे कानून बनाए गए हैं। 2004 में आए इस टैक्स कानून के तहत हर प्रॉस्टिट्यूट को शहर को 150 यूरो हर महीने देना पड़ता है। पार्ट टाइमर को अपने हर दिन के काम के लिए 6 यूरो चुकाने पड़ते हैं। इस सेक्स टैक्स की बदौलत यहां 1 मिलियन यूरो वार्षिक की आमदनी होती है।

Wednesday, 24 January 2018

एक राष्ट्र एक चुनाव विचार विषय पर सम्मेलन


कंसेशेशन ऑफ एजुकेशन एक्सलेंस ने मुंबई में किया आयोजन
देश के 15 राज्यों के 175 प्रतिनिधियों ने की शिरकत


कंसेशेशन ऑफ एजुकेशन एक्सलेंस (सीईई) ने राष्ट्र की वर्तमान राजनीति के समकालीन विषय पर राष्ट्रीय सम्मलेन का आयोजन किया। इसका आयोजन रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी प्रशिक्षण संस्थान, मुंबई में किया गया। इसमें देश के 15 राज्यों के 175 प्रतिनिधियों ने शिरकत की।
इस सम्मेलन के दौरान चुनावों की बहुलता और इसकी चुनौतियों, एक साथ चुनाव: संकल्पना की व्यवहार्यता और निष्पादन, एक राष्ट्र एक चुनाव के लिए संवैधानिक प्रावधान और एक राष्ट्र एक चुनाव के संदर्भ में वैश्विक अनुभव पर विचार-विमर्श किया गया। संपूर्ण भारत विषय पर शोध पत्र को आमंत्रित करने के लिए शिक्षा उत्कृष्टता परिसंघ (सीईई) एजुकेशन नेटवर्क पार्टनर था। अत्यधिक प्रयासों के उपरांत, क्षेत्र के विशेषज्ञों के पैनल ने शोध पत्रों का चयन किया।
इस अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार मुख्य अतिथि थे। आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव प्रो. वी के मल्होत्रा भी इस दौरान मौजूद रहे। रामशेव म्हाल्गी प्रबोधिनी के उपाध्यक्ष, राज्यसभा सांसद व आईसीसीआर के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया। सीईई की ओर से इस कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर काक, शैक्षणिक निदेशक सीईई (पूर्व संस्थापक उपाध्यक्ष महामया तकनीकी विश्वविद्यालय) उपस्थित थे।
रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के अध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने एक राष्ट्र एक चुनाव के महत्व और लाभों पर प्रकाश डाला। सहस्त्रबुद्धे ने यह भी कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव नए भारत में सभी राजनीतिक सुधारों की जननी होगी। सहस्त्रबुद्धे ने अपने समापन टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रसिद्ध पंक्ति माना अन्धेरा घना है, पर दीया जलाना कहां मना है का जिक्र किया।
आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव प्रोफेसर वी के मल्होत्रा ने देश के लिए एक राष्ट्र एक चुनाव के लाभों पर बल दिया क्योंकि ऐसा करने से चुनाव में जनशक्ति के बहुत समय की बचत होगी, जो चुनावों के कारण बर्बाद होता है। इसका इस्तेमाल विकास कार्य के लिए किया जा सकता है जिससें निकट भविष्य में भारत एक महाशक्ति बन कर उभर सकता है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने अपने महत्वपूर्ण संबोधन में अपने देश में चुनावों पर खर्च होने वाली विशाल राशि को रेखांकित करते कहा कि यदि हम एक राष्ट्र एक चुनाव को स्वीकार कर लेते हैं और यदि एक साथ चुनाव आयोजित किए जाते हैं तो हम एक देश के रूप में बहुत अधिक राशि की बचत कर सकते हैं। इस राशि को विकास और बुनियादी परियोजनाओं पर खर्च कर सकते है। राजीव कुमार ने चुनावी प्रणाली की तुलना शेयर बाजार के साथ करते हुए कहा कि यदि कोई उम्मीदवार या किसी खास पार्टी ने अच्छा काम किया है तो वह फिर से निर्वाचित हो जाता है और अगर वह अच्छा काम नहीं करता है तो फिर से निर्वाचित होने की संभावना बहुत कम होती है, जो शेयर बाजार के समान ही है। अगर किसी विशेष कंपनी के परिणाम अच्छे आते हैं तो इसकी बाजार की कीमत में वृद्धि होती है और यदि परिणाम अच्छे नहीं हैं तो कीमत गिरती है। राजीव कुमार ने कहा कि वह खुश हैं कि राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए यह एक महत्वपूर्ण विषय का चयन किया गया है और उन्होंने आशा व्यक्त किया की कि आने वाले भविष्य में एक राष्ट्र एक चुनाव वास्तविकता होगी।

Tuesday, 23 January 2018

टेक्नोलॉजी, ट्वीट और वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम



स्वीटजरलैंड के दावोस शहर में आयोजित वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम में टेक्नोलॉजी, ट्वीट और सायबर स्पेस जैसे शब्द सुनाई पड़े। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में जमकर इन शब्दों का इस्तेमाल किया। जिसे सभी ने सराहा। अपने भाषण में मोदी ने टेक्नोलॉजी पर बोलते हुए गूगल और अमेजॉन जैसी कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने भाषण की शुरुआत में ही बता दिया कि साल 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने इस फोरम में भारत का नेतृत्व किया था। साल 1997 का दौर आज के दौर से बिल्कुल अलग है। इतना ही नहीं, चुनौतियां भी अब पहले के मुकाबले बदल गई हैं।

टेक्नोलॉजी और ट्वीट 
ट्वीटर पर सबसे ज्यादा फॉलोवर्स वाले मोदी ने कहा कि एक समय था जब ट्वीट करना मनुष्य का काम नहीं बल्कि चिडिय़ों का काम था। उन्होंने कहा कि 1997 आप इंटरनेट पर अमेजॉन शब्द ढूंढते तो आपको नदियां और घने जंगलों के बारे में सूचना मिलती थी। लेकिन आज अमेजॉन पर दुनिया की हर चीज उपलब्ध है। साथ ही मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी में समय, शांति, सुरक्षा जैसी नई और गंभीर चुनौतियां हम अनुभव कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी के जोडऩे, मोडऩे और तोडऩे तीनों आयामों का बड़ा उदाहरण सोशल मीडिया के प्रयोग में देखने को मिलता है। मोदी ने वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए अपने भाषण में कहा कि डाटा बहुत बड़ी संपदा है। डाटा के ग्लोबल फ्लो से सबसे बड़े अवसर बन रहे हैं और सबसे बड़ी चुनौती भी। डाटा सहेजना भी एक बहुत गंभीर विषय बन रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि जो डाटा को काबू में रखेगा वो ही भविष्य पर अपना वर्चस्व बनाएगा।

Monday, 22 January 2018

Republic Day & ASEAN

राजपथ पर माउंट आबू स्कूल के छात्र दिखाएंगे आसियान देशों की संस्कृति
सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड जैसे देशों की संस्कृति को देखने के लिए अब इन देशों में जाने की कोई जरूरत नहीं है। इसे जल्द ही राजपथ पर देखा जा सकेगा। दरअसल, भारतीय गणतंत्र दिवस के परेड समारोह में इस बार सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, जैसे देशों की संस्कृति से संबंधित कार्यक्रम को शामिल किया गया है। दौरान राजपथ पर इन देशों के पहनावे से लेकर संगीत का लुत्फ उठाया जा सकेगा।

150 स्कूली छात्र और 10 देशों की संस्कृति 
बता दें कि गणतंत्र दिवस समारोह 2018 के लिए भारत की ओर से आसियान (एसोसियशन ऑफ साउथ ईस्ट नेशंस) देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों को मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब गणतंत्र दिवस समारोह पर एक साथ दस देशों के राष्ट्राध्यक्षों को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए परेड के दौरान इन देशों की संस्कृति, संगीत, वेशभूषा को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम को शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम को रोहिणी सैक्टर-5 के माउंट आबू स्कूल के छात्र बखूबी पेश करेंगे।  इनमें 150 बच्चे हैं।

स्कूल ग्राउंड से लेकर राजपथ तक परेड की रिहर्सल 
गणतंत्र दिवस के मौके पर आसियान देशों की झलक पेश करने के लिए ये छात्र जमकर मेहनत कर रहे हैं। स्कूली छात्र परेड की तैयारियों के मद्देनजर स्कूल ग्राउंड से लेकर राजपथ तक परेड की रिहर्सल में जुटे हैं। छात्र राजपथ पर देश के साथ-साथ आसियान देशों की मिलीजुली संस्कृति पेश करने को देशभक्ति बताते हैं।

राजपथ पर आसियान की झलक
परेड के दौरान 150 छात्र भारत के अलावा 10 आसियान देशों की वेशभूषा, रीति-रिवाज, नृत्य, संगीत को पेश करेंगे। इस दौरान भारतीय संस्कृति, देश की छठा व धार्मिक विचारों की भी छवि राजपथ पर ये छात्र प्रदर्शित करेंगे। राजपथ पर छात्र कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, ब्रुनेई, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम की वेशभूषा में दिखाई देंगे। कार्यक्रम के दौरान छात्र आसियान सदस्य देशों का झंडा, देशों के नाम संबंधित बैनर, फुल के गुच्छे हाथों में थांमे आपसी भाईचारे का संदेश देंगे।

देशभक्ति का जोश  
बैंड की धुन पर की गई रिहर्सल के दौरान बच्चों का देशभक्ति के प्रति जज्बा देखते ही बनता था। इनमें विभिन्न कक्षाओं के छात्र शामिल हैं। रिहर्सल के दौरान छात्र परेड के लिए जमकर पसीना बहा रहे हैं। रिहर्सल कर रहे छात्र देशभक्ति के जोश से लबरेज दिखे। इन छात्रों का मानना है कि मेहमान देशों की संस्कृति से संबंधित कार्यक्रम उन देशों के राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष पेश करने से भारत के साथ इन देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे। इससे हमारे देश को ही कहीं न कहीं फायदा होगा। इस कार्य को छात्र देशहित में किया गया काम मान रहे हैं।