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Thursday, 15 February 2018

एनजीटी: दिल्ली सरकार नहीं कर सकती पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन


क्षतिपूर्ति के लिए लगाए जाने वाले पौधों के लिए द्वारका में नहीं मिली उपयुक्त जगह
डीएमआईसीडीसी ने कहा, जल्द लिया जाए मामले फैसला

दिल्ली सरकार पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन करने में असमर्थ है। यह तर्क सरकार की ओर से एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया जिसमें ट्रांसप्लांटेशन करने की मांग की गई थी। सरकार ने यह जवाब द्वारका में प्रस्तावित इंटरनेशनल एग्जिीबिशन कम कंवेंशन सेंटर मामले में दिया है। याचिककर्ता की ओर से मांग की गई थी कि इंटरनेशनल एग्जिीबिशन कम कंवेंशन सेंटर बनाने के लिए पेड़ों को काटा न जाए बल्कि इनका ट्रांसप्लांटेशन किया जाए। इस पर दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यहां पर पेड़ सीधे नहीं बल्कि आढ़े-तिरछे हैं। इस तर्क के साथ ही दिल्ली सरकार ने याचिककर्ता की मांग को मानने से इंकार कर दिया।
वहीं, याचिकाकर्ता द्वारा क्षतिपूर्ति के लिए लगाए जाने वाले पौधे द्वारका क्षेत्र में ही लगने चाहिए, के जवाब में सरकार ने कहा कि हमें कोई और उपयुक्त जगह नहीं मिली लिहाजा यमुना किनारे लगाने की योजना बनाई गई है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि द्वारका में बहुत सी उपयुक्त जगहें मौजूद हैं। इसलिए फिर से यहीं लगाने की व्यवस्था पर विचार किया जाए। अब इस मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।
वहीं, जस्टिस राघवेंद्र एस राठौड़ व एक्सपर्ट मेंबर डॉ. सत्यवान सिंह गरब्याल की बेंच के समक्ष दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कोरपोरेशन लिमिटेड (डीएमआईसीडीसी) ने कहा कि मामले में जल्द से जल्द फैसला लिया जाए क्योंकि पहले ही उद्घाटन में देरी हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े इंटरनेशनल एग्जिीबिशन कम कंवेंशन सेंटर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना है। गौरतलब है कि द्वारका सबसिटी में एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा इंटरनेशनल एग्जिीबिशन कम कंवेंशन सेंटर बनाए जाने की योजना है। इसके लिए प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित जगह पर 1961 पेड़ों को काटे जाने हैं। इसी मामले को लेकर एक याचिका एनजीटी में दाखिल की गई थी।

साभार: पंजाब केसरी

Monday, 22 January 2018

द्वारका में इंटरनेशनल एग्जिीबिशन कम कंवेंशन सेंटर के लिए काटे जाएंगे 1961 पेड़


एशिया का सबसे बड़ा एग्जिीबिशन कम कंवेंशन सेंटर बनाने की है तैयारी
पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल


दिल्ली को वल्र्ड क्लास सिटी बनाने के लिए एक बार फिर से यहां पर हजारों पेड़ों की बलि दी जाएगी। द्वारका सबसिटी में मोस्ट अवेटेड प्रोजेक्ट इंटरनेशनल एग्जिीबिशन कम कंवेंशन सेंटर (ईसीसी) के लिए लगभग दो हजार पेड़ काटे जाएंगे। खास बात यह है कि इसके लिए इस प्रोजेक्ट को इंवायरमेंटल क्लीयरेंस भी मिल चुका है। ऐसे में एक प्रोजेक्ट के लिए इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटे जाने का विरोध भी शुरू हो गया है। पर्यावरण से जुड़े लोग अब इस मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) जाने की तैयारियों में जुट गए हैं। इन लोगों का कहना है कि पहले ही दिल्ली मैट्रो जैसे प्रोजेक्टों के लिए दिल्ली में हरियाली का विनाश किया जा चुका है। जिसका खामियाजा आज दिल्ली की जनता को प्रदूषण के रूप में भुगतना पड़ रहा है। यदि द्वारका में इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए तो स्थिति और भयावह हो सकती है।

काटे जाएंगे 1961 पेड़
द्वारका सैक्टर-25 में लगभग 26,000 करोड़ की लागत से इंटरनेशनल एग्जिीबिशन कम कंवेंशन सेंटर बनाया जाना है। इसके लिए बकायदा एक सर्वे कराया गया था जिसके बाद रिपोर्ट पेश की गई कि इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 1961 पेड़ों को काटने की जरूरत होगी। बता दें कि इस इंटरनेशनल लेवल के कंवेंशन सेंटर के निर्माण के लिए दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कोरपोरेशन लिमिटेड को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है।

89.72 हेक्टेयर में बनेगा कंवेंशन सेंटर
द्वारका के सेक्टर-25 में 89.72 हेक्टेयर भूमि को इस परियोजना के लिए डीडीए ने स्थानांतरित किया था। इसका बिल्ट-अप एरिया 10.2 लाख वर्ग मीटर होगा। यहां पर एग्जिीबिशन हॉल, कंवेंशन सेंटर, बैंक्वेट हॉल्स, फाइनेंशियल सेंटर, होटल, फूड एंड बिवरेड आउटलेट्स के अलावा ऑफिस, रिटेल और सर्विस अपार्टमेंट की भी सुविधा होगी। एक बार में यहां पर पांच हजार से दस हजार प्रतिनिधियों की मेजबानी करने की क्षमता होगी।

-राजेश रंजन सिंह
साभार पंजाब केसरी