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Tuesday, 6 February 2018

Why is cosmetic treatment a taboo in our country

explains celebrity Dr. Monica Kapoor
Ours is the country where aesthetic appearance is the parameter for acceptance. This is the reason why showbiz industry is going gaga over the new cool i.e Cosmetic treatment. What’s ironical is that despite the wide popularity, people (actors specifically) resort to denial and prefer to stay tight-lipped.
But why is it treated as a taboo in India?
Well, Dr. Monica Kapoor does not agree with the stated fact and feels that refraining from talking about cosmetic treatment and surgeries have become a fashion. Monica, a renowned name of the cosmetic and aesthetic industry said, “Cosmetic surgeries are not a taboo in our country rather it has become a fashion in Bollywood and glamour industry to refrain from talking about it. Celebrities are in the industry because of their beautiful looks and good physique to a certain extent, and if they get something corrected in their body- which they are not happy about- they hide it from media and other people. The reason is they don't want people to hype it and make fun of it.”
Dr. Monica Kapoor
Speaking further, she said, “Also, most of them probably want to show to the world that beauty they have is all God gifted, all natural. Very few people are so courageous that they come in open and discuss the surgeries and treatment they have undergone.”
Saluting the people who gather courage to speak of their flaws and correction treatment they underwent, Monica adds a piece of advice saying, “ I would like to give sincere advice to them that if you get something corrected with the help of medical treatments, do not hesitate in talking about it. In fact, you should boast as much as possible.”
Owing to the technological advancements, we have so many medical and surgical treatments handy which are boon to this glamour world. In reference to the same, she further asks the people to “promote it as much as possible. Talking about this cosmetic treatments and surgeries would help the people get aware of it so that they can also take advantages of this gift. After all, no one is born perfect,” she stated.

Sunday, 28 January 2018

जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में दिल के मरीजों को लगाया जा सकेगा स्टेंट

दिल के मरीजों को स्टेंट लगवाने के लिए अब एम्स और जीबी पंत जैसे अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसकी सुविधा अब पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में मिल सकेगी। इस सुविधा की शुरूआत शनिवार से हो गई है। इसका शुभारंभ दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इसका उद्घाटन किया। लैब के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन व स्थानीय विधायक राजेश ऋषि मौजूद व अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर मंहेदी रत्ता मौजूद रहेे। इससे अब इसी अस्पताल में दिल के मरीजों को स्टेंट लगाया जा सकेगा।
Janakpuri Super Speciality Hospital
दिल्ली सरकार का यह दूसरा अस्पताल है जहां पर हार्ट में ब्लॉकेज होने पर स्टेंट के जरिए इलाज संभव है। स्टेंट सिर्फ 22 हजार रुपये में उपलब्ध है।  अस्पताल में कार्डियोलॉजी लैब बनकर तैयार हो चुका है। अब तक 70 मरीजों को स्टेंट लगाया जा चुका है। दिल्ली सरकार के इस अस्पताल में स्टेंटिंग की सुविधा शुरू होने से दिल्ली सहित पूरे एनसीआर के मरीजों को फायदा होगा। इससे पहले दिल्ली सरकार के सिर्फ जीबी पंत अस्पताल में ही स्टेंटिंग की जाती थी। यह सरकार का एकमात्र ऐसा अस्पताल था, जहां पर हार्ट के मरीजों में स्टेंट लगाया जाता था। दिल्ली में सबसे ज्यादा स्टेंट लगाने का काम जीबी पंत में होता है। स्टेंटिंग के लिए एम्स से भी ज्यादा मरीजों का प्रेशर इस अस्पताल पर होता है। स्टेंट की कैपिंग लागू होने से पहले ही सिर्फ 22 हजार में स्टेंट उपलब्ध कराया जाता रहा है।
जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बहुत पहले बन कर तैयार हो चुका था। लेकिन यहां पर इलाज शुरू नहीं हो पा रहा था। डॉक्टर और स्टाफ की कमी की वजह से सालों यह अस्पताल ऐसे ही खड़ा रहा। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद इस अस्पताल में दिल की बीमारी का इलाज शुरू हुआ। पहले ओपीडी में मरीजों को देखा जा रहा था। ब्लॉकेज होने पर स्टेंट के लिए मरीज को दूसरे अस्पताल भेजा जाता था। अब इसी अस्पताल में स्टेंट के लिए कार्डियोलॉजी लैब बनाया गया है। डॉक्टरों की नियुक्ति का काम चल रहा है। इसी तरह इस अस्पताल में गेस्ट्रोलॉजी यूनिट में मरीजों की पेट से संबंधित जांच के लिए इंडोस्कोपी लैब बनाया गया है।

Thursday, 25 January 2018

Bawana Industrial Area & Fire Safety

25 Jan 2018, Page No.10, Punjab Kesari

आग से बचाव के लिए सिर्फ 1 करोड़

बवाना औद्योगिक क्षेत्र बसाया लेकिन नहीं दी सुविधाएं 

दिल्ली सरकार समेत दूसरी एजेंसियां औद्योगिक क्षेत्र को लेकर नहीं हैं गंभीर

आग से बचाव के लिए डीएसआईआईडीसी ने सिर्फ 1 करोड़ किया था प्रस्तावित

कहने को तो दिल्ली सरकार ने बवाना औद्योगिक क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से बसाया था। लेकिन यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं की खुलेआम अनदेखी की गई। जिसका नतीजा हाल ही में लगी आग की घटना के रूप में सामने आया। अब सवाल उठने लगे हैं कि सरकार ने इतने बड़े औद्योगिक क्षेत्र को बसाने से पहले स्वास्थ्य सेवाओं और आग से निपटने की स्थिति से बचने के उपायों पर गौर क्यों नहीं किया जबकि बवाना औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 16 हजार फैक्ट्रियों में लगभग एक लाख लोग काम करते हैं।

आग से बचाव के लिए 1 करोड़
दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवेलपमेंट कोरपोरेशन (डी.एस.आई.डी.सी.) की एक रिपोर्ट के मुताबिक बवाना औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए सुविधाओं के नाम पर लगभग 700 करोड़ रूपए खर्च किए गए। इसमें सबसे ज्यादा 200 करोड़ पावर पर, रोड के लिए 162 करोड़ और पानी सप्लाई के लिए 100 करोड़ खर्च किए गए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े औद्योगिक क्षेत्र में आग से बचाव (फायर फाइटिंग) के लिए सिर्फ एक करोड़ की राशि ही प्रस्तावित की गई थी। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार बवाना जैसे औद्योगिक क्षेत्र में आग से बचाव को लेकर कितनी गंभीर थी।

स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर खानापूर्ति
इतना ही नहीं, स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीरता नहीं बरती गई। सरकार ने हमेशा से ही औद्योगिक क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को दरकिनार किया है। बता दें कि बाहरी दिल्ली में सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र और महर्षि वाल्मीकि जैसे दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पताल हैं। लेकिन हमेशा ही बड़ी घटना घटने पर इन दोनों ही अस्पतालों से मरीजों को डीडीयू, अंबेडकर, सफदरजंग या एलएनजेपी जैसे अस्पतालों में रैफर कर दिया जाता है। बवाना में लगी आग की घटने के दिन कूदकर जान बचाने वाले लोगों को भी यहां पर्याप्त इलाज न मिलने पर एलएनजेपी अस्पताल रैफर कर दिया गया था। यहां के फैक्ट्री मालिकों का भी कहना है कि जब हम सरकार को टैक्स के रूप में मोटी रकम देते हैं तो यहां पर बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम क्यों नहीं किया जाता है। उनका कहना है कि शुरूआती दिनों में तो यहां पर सब कुछ ठीक था। लेकिन समय बीतने के बाद ही यहां पर सडक़, सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाएं भी हवा होती चली गईं। वर्तमान में यहां पर सडक़ें भी जर्जर होने लगी हैं और सीवरेज भी सफाई के अभाव में खस्ताहाल होने लगे हैं।

साभार: पंजाब केसरी
DSIIDC