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Saturday, 27 January 2018

पानी की गुणवत्ता मामले में सिविक बॉडीज के हेड तलब


जल बोर्ड, एनडीएमसी, दिल्ली कैंट बोर्ड और सीजीडब्ल्यूए को आवश्यक आंकड़ा उपलब्ध कराने पर लगाई फटकार

एनजीटी ने दिल्ली की विभिन्न सिविक बॉडीज की खिंचाई की है। यह खिंचाई एनजीटी द्वारा कई बार दिए गए निर्देशों के बाद भी पीने के पानी की गुणवत्ता पर आंकड़ा नहीं सौंपने के लिए की गई है। साथ ही एनजीटी ने पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों के रूख को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। सुनवाई के दौरान एनजीटी एक्टिंग चेयरपर्सन जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली बेंच ने संबंधित सिविक बॉडीज के हेड को समन जारी किया है। इसके तहत दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ, दिल्ली कैंट बोर्ड के सीईओ, केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के कमिश्नर को एनजीटी के समक्ष 31 जनवरी को तलब किया गया है। बेंच ने कहा कि जल बोर्ड, एनडीएमसी, दिल्ली कैंट बोर्ड और सीजीडब्ल्यूए को आवश्यक आंकड़ा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अभी तक न तो आंकडे एकत्र किए गए और न ही उनका विश्लेषण किया गया है। मामले में अगली सुनवाई 31 जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान एनजीटी को जानकारी दी गई कि इस मामले एनजीटी के 10 दिसंबर, 2015 को दिए गए निर्णय का अनुपालन करते हुए दो बैठकें आयोजित की गई हैं। बता दें कि दिल्ली के घरों में आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर एनजीटी ने संज्ञान लिया था। इस मामले को लेकर एनजीटी ने इंवायरमेंट सेक्रेटरी, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी), दिल्ली जल बोर्ड व तीनों निगमों के अधिकारियों को लेकर एक कमेटी गठित की थी। इसके तहत एक विस्तृृत रिपोर्ट मांगी गई थी।

Tuesday, 23 January 2018

आग की घटना रोकने के लिए निगम के पास नहीं है कोई एक्शन प्लान


निगम ने शुरु की थी प्लास्टिक, रबड़ आदि के गोदामों पर सख्त कार्रवाई की कवायद
जगह-जगह आग लगने की घटना के बाद हाउस में लाया गया था प्रस्ताव


बवाना में लगी आग की घटना ने एक बार फिर सीविक एजेंसियों की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हालांकि पहले भी कई आग की घटनाओं के बाद निगम ने आग की वजह बनने वाले व्यापारों पर कार्रवाई की बात तो कही थी। लेकिन वोटबैंक की राजनीति के कारण इन व्यापारों पर किसी भी प्रकार की कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। यहीं वजह है कि बवाना जैसे इलाके में फैक्टी में आग लगी और कई जानें मौत का शिकार हो गई।
जानकारी के मुताबिक दिल्ली के विभिन्न इलाकों में खास तौर पर बाहरी व देहात दिल्ली में जगह-जगह प्लास्टिक, रबड़ आदि के गोदाम बने हुए हैं। जोकि बिना किसी एजेंसी की अनुमति के धड़ल्ले से चल रहे हैं। दरअसल, नॉर्थ एमसीडी ने इस तरह के गोदामों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान भी किया था लेकिन निगम की ये मुहिम सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गई और नतीजा बवाना में लगी आग की घटना में मारे गए लोगों के रूप में सामने है।
बता दें कि साल 2016 के नवंबर माह के दौरान नॉर्थ एमसीडी हाउस में तत्कालीन कमिश्नर प्रवीण कुमार गुप्ता ने आकस्मिक दुर्घटनाओं पर रिपोर्ट पेश करते हुए इस तरह के गोदामों में आग लगने की घटना की जानकारी दी थी। जिसके बाद हाउस में यह मुद्दा बड़े ही जोर-शोर से उठाया गया था। हाउस में जवाब मांगा गया था कि इस तरह के गोदामों पर कार्रवाई करने का अधिकार किस एजेंसी के पास है। इसके जवाब में तत्कालीन अडिश्नल कमिश्नर संजय गोयल ने हाउस को जानकारी दी थी कि इन पर कार्रवाई करने का अधिकार निगम के क्षेत्राधिकार में ही आता ही। साथ ही यह जानकारी भी दी थी कि इन लोगों के पास ट्ऱेड लाइसेंस नहीं होता है और न ही ऐसा कोई नियम है जिसके तहत इन्हें लाइसेंस के दायरे में लाया जाए।
इसके बाद निगम ने आवासीय क्षेत्रों में जहां पर बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं, ऐसी जगहों से गोदामों का खाली कराने का निर्णय लिया था। कहा गया था कि यहां पर इन गोदामों में आग लगने से बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। इसलिए कार्रवाई करने की सख्त जरूरत है। निगम ने यह भी कहा था कि ऐसा ट्रेड करने वालों को नोटिस जारी कर अलॉटेड पीवीसी मार्केटों में जाने को कहा जाएगा। इसके लिए बकायादा उन्हें समय भी दिया जाएगा। इसके अलावा ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी लेकिन इस फैसले को अमल में नहीं लाया जा सका और आज भी दुर्घटना की संभावना जस की तस बरकरार है।

कोर्ट के आदेश की हो रही है अवेहलना
पूठ कलां गांवमें भी ऐसा ही हादसे की आशंका बनी रहती है। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि यहां पर चल रही अवैध फैक्ट्रियों में बड़ी संख्या में बोरवेल लगे हुए हैं जिनसे प्लास्टिक की धुलाई का कार्य होता है। इस धुलाई के काम में लाखों लीटर भूजल का दोहन हो रहा है। पूठ कलां गांव व उसके आसपास के रिहायशी क्षेत्र में प्लास्टिक धुलाई और भ_ियां चल रही है। ऐसे में गांव निवासियों द्वारा बार-बार शिकायत करने पर भी संबंधित विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही हैं।

-राजेश रंजन सिंह
साभार: पंजाब केसरी 

Monday, 22 January 2018

Bawan Fire, Civic Bodies & Action Plan

आग की घटना रोकने के लिए निगम के पास नहीं है कोई एक्शन प्लान
-निगम ने शुरु की थी प्लास्टिक, रबड़ आदि के गोदामों पर सख्त कार्रवाई की कवायद
-जगह-जगह आग लगने की घटना के बाद हाउस में लाया गया था प्रस्ताव

बवाना में लगी आग की घटना ने एक बार फिर सीविक एजेंसियों की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हालांकि पहले भी कई आग की घटनाओं के बाद निगम ने आग की वजह बनने वाले व्यापारों पर कार्रवाई की बात तो कही थी। लेकिन वोटबैंक की राजनीति के कारण इन व्यापारों पर किसी भी प्रकार की कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। यहीं वजह है कि बवाना जैसे इलाके में फैक्टी में आग लगी और कई जानें मौत का शिकार हो गई।
जानकारी के मुताबिक दिल्ली के विभिन्न इलाकों में खास तौर पर बाहरी व देहात दिल्ली में जगह-जगह प्लास्टिक, रबड़ आदि के गोदाम बने हुए हैं। जोकि बिना किसी एजेंसी की अनुमति के धड़ल्ले से चल रहे हैं। दरअसल, नॉर्थ एमसीडी ने इस तरह के गोदामों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान भी किया था लेकिन निगम की ये मुहिम सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गई और नतीजा बवाना में लगी आग की घटना में मारे गए लोगों के रूप में सामने है।
बता दें कि साल 2016 के नवंबर माह के दौरान नॉर्थ एमसीडी हाउस में तत्कालीन कमिश्नर प्रवीण कुमार गुप्ता ने आकस्मिक दुर्घटनाओं पर रिपोर्ट पेश करते हुए इस तरह के गोदामों में आग लगने की घटना की जानकारी दी थी। जिसके बाद हाउस में यह मुद्दा बड़े ही जोर-शोर से उठाया गया था। हाउस में जवाब मांगा गया था कि इस तरह के गोदामों पर कार्रवाई करने का अधिकार किस एजेंसी के पास है। इसके जवाब में तत्कालीन अडिश्नल कमिश्नर संजय गोयल ने हाउस को जानकारी दी थी कि इन पर कार्रवाई करने का अधिकार निगम के क्षेत्राधिकार में ही आता ही। साथ ही यह जानकारी भी दी थी कि इन लोगों के पास ट्ऱेड लाइसेंस नहीं होता है और न ही ऐसा कोई नियम है जिसके तहत इन्हें लाइसेंस के दायरे में लाया जाए।
इसके बाद निगम ने आवासीय क्षेत्रों में जहां पर बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं, ऐसी जगहों से गोदामों का खाली कराने का निर्णय लिया था। कहा गया था कि यहां पर इन गोदामों में आग लगने से बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। इसलिए कार्रवाई करने की सख्त जरूरत है। निगम ने यह भी कहा था कि ऐसा ट्रेड करने वालों को नोटिस जारी कर अलॉटेड पीवीसी मार्केटों में जाने को कहा जाएगा। इसके लिए बकायादा उन्हें समय भी दिया जाएगा। इसके अलावा ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी लेकिन इस फैसले को अमल में नहीं लाया जा सका और आज भी दुर्घटना की संभावना जस की तस बरकरार है।