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Wednesday, 9 January 2019

Total Shut Down in DU for 2 days

Teachers express anger against the VC and Government

The DUTA congratulates the teachers of Delhi University who participated enthusiastically in the 2 day shut-down of the University. Teaching in colleges came to a standstill as DUTA activists moved across colleges to mobilize teachers for today’s dharna. Today, thousands of teachers turned up in large numbers at Gate No. 1 to express their collective anger at the failure of the Government and the Vice-Chancellor to resolve their long standing demands.

The success of the shut-down is testimony to the fact that teachers are unwilling to tolerate the Government’s single minded agenda to destroy public funded education. Apart from the push to privatization and commercialization, the realization that thousands are languishing without permanent jobs, promotions have become a distant proposition for most teachers and pensioners are facing huge set-backs in the twilight of their life has pushed the all sections of teachers of DU on the warpath.

Speakers also highlighted the complete failure of the Vice-Chancellor of DU to ensure the adoption of the UGC Regulations 2018 so that teachers denied promotions for long years can get their rightful due. The over-bureaucratic approach of the VC has paralyzed the academic and administrative functioning of the University. The DUTA warns the Vice-Chancellor to desist from further procrastination and immediately call a meeting of the Academic Council and table the recommendations of the committee set up to facilitate the framing of relevant Ordinances in accordance with UGC Regulations.

The palpable anger at the Government’s denial of even the most basic rights to teachers including revised allowances and pensions, resolutions of the anomalies of the VI Pay Revision including stepping up, removal of the negative clauses of the UGC Regulations and denial of pension through challenges to rightfully won court cases, was expressed through slogans and speeches. The young teachers are particularly exercised by the fact that appointments have been delayed for one reason or the other and neither the Government nor the University is willing to take cognizance of their plight. The silence on the issue of the reservation roster to ensure treating the University/ College as a unit clearly shows the Govt’s intention.

The DUTA also expressed its solidarity with the All India Trade Union Strike and is determined to join hands with all sections of society to fight for the scrapping of the NPS and the demands of absorption/ regularization.

Tuesday, 13 February 2018

13 FEB 2018, Page No.2, Punjab Kesari

लक्ष्य हासिल करने के बाद बढ़ते रहें आगे


डॉ. साधना शर्मा, प्रिंसिपल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी



जीवन में अगर कुछ करने का जज्बा हो तो लाख परेशानियां भी आपको अपने मकसद से दूर नहीं कर सकती। अपने काम पर युवाओं को फोकस करना चाहिए क्योंकि युवाओं की विचारधारा में ज्यादातर बिखराव नजर आता है। उन्हें कोई लक्ष्य नहीं दिखता। युवाओं को सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित कर उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। निरंतर प्रयत्न करने से ही लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे। लक्ष्य प्राप्ति के बाद भी नहीं रूकना चाहिए बल्कि विकास के लिए उस दिशा में प्रयास शुरू करना चाहिए। यह कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज (एसपीएम) की प्रिंसिपल डॉ. साधना शर्मा का। डॉ. शर्मा का यह भी कहना है कि
होके मायूस न यूं शाम से ढ़लते रहिए.. जिंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए। 
एक ही पैर पर ठहरोगे तो थक जाओगे..धीरे धीरे ही सही मगर चलते तो रहिए।  

डॉ. साधना शर्मा का जन्म अक्टूबर 1960 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुआ था। स्कूली शिक्षा उपरांत दिल्ली यूनिवर्सिटी एम.ए, एम.फिल तथा पी.एच.डी. की पढ़ाई पूरी की। हायर एजुकेशन के साथ ही थियेटर, पत्रकारिता के क्षेत्र में भी महारत हासिल की। डॉ. शर्मा दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन और स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में भी छात्रों को पढा चुकी हैं और साल 1990 से ही एसपीएम कॉलेज में पढ़ाने से लेकर प्रिंसिपल तक का सफर तय किया है।

सिविल सर्विसेज का इंटरव्यू छोड़ शिक्षक बनीं 
डॉ. शर्मा ने बताया कि दिल्ली में उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी की। देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित परीक्षा में प्री और मेंस भी क्लेयर कर लिया था। लेकिन इंटरव्यू देने नहीं गईं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ गईं। मां चाहती थी कि शिक्षा के क्षेत्र में जाए। अब तक कई किताबें लिख चुकी हैं। जिनमें पत्रकारिता से लेकर नाटक, कहानी, रिसर्च विधाएं शामिल हैं। जयशंकर प्रसाद के नाटकों का शैली वैज्ञानिक अध्ययन, आषाढ़ का एक दिन: भाषिक संरचना, सामाजिक समरसता की चुनौतियां  (संपादित), संचार का स्वरूप प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं। इसके अलावा डॉ. शर्मा ने समय सरोकार पत्रिका का संपादन भी किया है।

हिंदी का बढ़ा है चलन
व्यवहार में हिंदी भाषा ही चल रही है। पढ़ाई के संबंध में छात्र औपचारिक पाठ्यक्रम चाहते हैं कि अंग्रेजी में पढ़े। यही वजह है कि दूरदराज के इलाकों और गांवों में लोग चाहते हैं कि उनका बच्चा इंग्लिस मीडियम स्कूल में पढ़े। मेरा मानना है कि युवा भी हिंदी भाषा का प्रयोग कर रहा है। 80 के दशक में यूनिवर्सिटी में भी बोलचाल में अंग्रेजी का बहुत ज्यादा प्रयोग होता था लेकिन अब बहुत बदलाव आया है।

सदा सकारात्मक रहें
जिंदगी को लेकर हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए। ईश्वर या किसी व्यक्ति से कोई शिकायत नहीं करता। जिंदगी का मतलब लोगों को खुश रखना होना चाहिए। खुद के लिए जीने का कोई मतलब नहीं। साथ ही सफलता का मतलब पैसा नहीं होना चाहिए। जिंदगी में कभी भी अपने मन में निराशाओं को घर न करने दें।

सिखा चुकी हैं पत्रकारिता के गुर
दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी ऑनर्स समेत कई विषयों में ऑपश्नल पेपर के तौर पर जर्नलिज्म सब्जेक्ट को शामिल किया गया था। उसी दौरान छात्रों को कॉलेज में पत्रकारिता के गुर सिखाए। डॉ. शर्मा ने भी पत्रकारिता पढ़ाने से पूर्व इग्नू से डिप्लोमा हासिल किया। आज उनके पढ़ाए छात्र बेहतर मुकाम हासिल कर चुके हैं।

हिम्मत और सम्मान के साथ काम करना चाहिए
डॉ. साधना शर्मा का कहना है कि जीवन में खेलकूद, घूमना-फिरना सब जरूरी है लेकिन सबसे अहम होता है करियर बनाना। अपने कॉलेज की छात्राओं को कहती हूं कि कोई भी काम करो लेकिन वह काम ऐसा होना चाहिए कि आपको स्वयं भी अच्छा महसूस हो सके। हर काम हिम्मत के साथ करो, सम्मान के साथ करो और इस तरीके का काम करो कि उसके बारे में बता सको कि आप क्या काम कर रहे हो।


---राजेश रंजन सिंह

साभार: पंजाब केसरी 

Sunday, 4 February 2018

तन से नहीं, मन से होता है युवा



मंजुला दास, प्रिंसिपल, सत्यवती कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी


युवा मन से होता है, तन से नहीं। यदि आप जीवंत हैं और जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं तो आप युवा हैं। सही दिशा में प्रयास बेहद जरूरी, नहीं तो पूरी उम्र लगा दीजिए सफलता नहीं मिलेगी। यह कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के सत्यवती कॉलेज की प्रिंसिपल मंजुला दास का। शिक्षण पृष्ठभूंिम वाले परिवार से संबंधित दास भी पिछले 41 सालों शिक्षण कार्य कर रही हैं। दास का मंत्र है कि जोश, जज्बा और जुनून इंसान के भीतर हो तो वह कोई भी लक्ष्य हासिल कर सकता है।

मंजुला दास, प्रिंसिपल

दिल्ली की रहने वाली मंजुला दास का जन्म 1955 में हुआ था। स्कूली शिक्षा दिल्ली के नामी स्कूल लेडी इरविन स्कूल से की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के आईपी कॉलेज से ही बीए (ऑनर्स) हिंदी में ग्रेजुएशन व एमए (हिंदी) की पढ़ाई पूरी की। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद डी. लिट के लिए रांची यूनिवर्सिटी का रूख किया। हायर एजुकेशन के साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी से फ्रेंच भाषा सीखने के लिए सर्टिफिकेट हासिल किया। बीए आनर्स के तीनों साल की टॉपर रहीं और एमए में दिल्ली यूनिवर्सिटी की टॉपर रहने के कारण गोल्ड मेडलिस्ट मिला। दास ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कमला नेहरु कॉलेज से अपने करियर की शुरूआत की और साल 1977 से ही सत्यवती कॉलेज में पढ़ाने से लेकर प्रिंसिपल तक का सफर तय किया।

15 साल की उम्र में शुरू किया लिखना
मुझे बचपन से ही लिखने का शौक था। लिहाजा 15 साल की उम्र में ही लिखना शुरू कर दिया था। अब तक 45 किताबें लिख चुकी हूं। जिनमें उपन्यास, नाटक, कहानी, कविताएं जैसी विधाएं शामिल हैं। सडक़, पुल और वे के लिए हिंदी अकादमी ने पुरस्कृत किया था। मुझे इंतजार था, अभी तो और जीना है प्रमुख कहानियां हैं।

बहुउद्देशीय होना जरूरी
आज के समय में जीवन के लिए एक ही लक्ष्य बनाना सही नहीं है। हमें बहुउद्देशीय होना चाहिए। इसके लिए एक-एक सीढ़ी चढक़र आगे बढ़ते रहना चाहिए। जीवन की भागदौड़ के बीच हमें अपने सकारात्मक शौक भी पूरा करना चाहिए। उन्होंने भी पढ़ाई के साथ-साथ अपने शौक को पूरा करने के लिए प्रयास किए और सफलता भी हासिल की। उन्होंने पेंटिंग, सिंगिंग, डांसिंग, न्यूमरोलॉजी में भी दक्षता पाई। अभी तक सौ से अधिक पेंटिंग बना चुकी हैं। कॉलेज में भी कई बार कार्यक्रमों के दौरान गुनगुनाकर सिंगिंग का शौक पूरा किया। इतना ही नहीं, न्यूमरोलॉजी का शौक तो इस कदर था कि इसे सीखने के दौरान इस क्षेत्र में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया।  

संघर्षशील ही करते हैं सफलता का सम्मान 
दास मानती हैं कि आज का युवा शॉर्टकट की तरफ ज्यादा भागता है। लेकिन इस शॉर्टकट में उलझाव ज्यादा है। वह बताती हैं कि जितनी मेहनत उन्होंने आट्र्स विषय की पढ़ाई को दौरान की, उतनी मेहनत साइंस विषय के छात्र भी शायद नहीं करते। उनका कहना है कि यदि मैंने मेहनत नहीं की होती तो आज इम मुकाम पर शायद नहीं होती। संघर्ष करके जब एक-एक सीढ़ी चढक़रमुकाम हासिल करते हैं तो हमें पता होता है कि हम किस रास्ते से होकर यहां तक पहुंचे हैं।  फिर हम उस सफलता का सम्मान भी करते हैं। एक संघर्षशील व्यक्ति ही सफलता का सम्मान कर सकता है। अचानक से मिलने वाली सफलता को लेकर हमारा स्वभाव भी कुछ अलग होता है। हम उसकी इज्जत नहीं कर पाते।

जापानी छात्रों को दी हिंदी की तालीम
टीचिंग के दौरान दास ने जापानी छात्रों को हिंदी भाषा की तालीम दी। मंजुला दास जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज (डिपार्टमेंट ऑफ हिंदी) में 1982-84 में गईं। यहां पर उन्होंने दो सालों तक विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर काम किया।

साभार:- पंजाब केसरी

--राजेश रंजन सिंह

Saturday, 27 January 2018

डीयू बुद्धिस्ट डिपार्टंमेंट में प्रश्न पत्र लीक

परीक्षा से एक दिन पहले ही छात्रों को मिल गया प्रश्न पत्र

यूनिवर्सिटी प्रशासन से की गई मामले की शिकायत

जुलाई माह के दौरान भी एमफिल, पीएच.डी का पर्चा हुआ था लीक 



यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में परीक्षा के दौरान पर्चा लीक होने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। देश के प्रतिष्ठित दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जहां परीक्षा से एक दिन पहले ही होने वाली परीक्षा का पर्चा लीक हो गया। परीक्षा में पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न सोशल मीडिया में वायरल हो गए। अब पूरे मामले की शिकायत यूनिवर्सिटी प्रशासन से की गई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के नामी प्रोफेसरो ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही कहा है कि इससे यूनिवर्सिटी की साख पर बट्टा लग रहा है और यहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों के करियर पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
पूरा मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट डिपार्टंमेंट का है। जानकारी के मुताबिक गुरूवार को बुद्धिस्ट एम.ए. (प्रथम वर्ष) की पाली विषय की पहली परीक्षा थी। लेकिन इसके पंद्रह नंबरों के पांच प्रश्न बुधवार शाम को ही लीक हो गए थे। ये प्रश्न छात्रों के पास व्हाट्सएप, हाइक जैसे सोशल मीडिया के जरिए पहुंचे। गुरूवार को जब पाली विषय का प्रश्न पत्र छात्रों को मिला तो पांचों प्रश्न हू-ब-हू मिले। इसके बाद हंगामा मच गया और दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन के होश उड़ गए। दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट डिपार्टमेंट के ही छात्र नेता सचिन चौधरी ने पूरे मामले की लिखित शिकायत डीन ऑफ एगजामिनेशन, डीयू रजिस्ट्रार, डीयू प्रॉक्टर, डीन फैकल्टी ऑफ आट्र्स समेत यूनिवर्सिटी प्रशासन के आला अधिकारियों से की है। शिकायत में पाली विषय की परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की मांग गई है। मामले को दबाने के लिए अब डीयू प्रशासन इस गंभीर मसले की लिपापोती में जुट गया है।
पूरे मामले पर डूटा कार्यकारिणी सदस्य डॉ. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब बुद्धिस्ट डिपार्टेमेंट में पर्चा लीक हुआ है। इससे पहले भी इसी साल जुलाई माह के दौरान एमफिल, पीएच.डी का पर्चा लीक हो चुका है। इसका भी पर्चा रद्द कराकर दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी। बुद्धिस्ट विभाग के हेड ने नियमों की अवमानना करते हुए आरक्षित श्रेणी के छात्रों को मैरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में दाखिला नहीं दिया। जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के 16 छात्र एम. फिल व पीएचडी दाखिले में मैरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में दाखिला पाने के हकदार थे। इस मामले को लेकर हाल ही में डीन ऑफ आट्र्स ने शो-कॉज नोटिस जारी किया था। कुमार का कहना है कि वर्तमान बुद्धिस्ट डिपार्टेमेंट के हेड के.टी.एस राव के कार्यकाल में लगातार गड़बडिय़ां सामने आ रही हैं। लिहाजा डीयू की साख बचाने और छात्रों के भविष्य के मद्देनजर हेड को हटाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि हेड को लेकर तीन कमेटियां बन चुकी हैं और दो बार पर्चें लीक हो चुके हैं। बावजूद इसके वीसी इन पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
बुद्धिस्ट डिपार्टेमेंट के हेड के.टी.एस. राव से जब हमने पूरे मामले में उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने पर्चा लीक होने की खबर को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अफवाह है। पर्चा लीक होना संभव ही नहीं है। पढ़ाने वाले शिक्षक ही प्रश्न पत्र तैयार करते हैं, वही सील करते हैं और परीक्षा के समय वहीं शिक्षक बंाटते हैं। प्रश्न पत्र किसी के हाथ नहीं लग सकता।

साभार: पंजाब केसरी