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Sunday, 20 January 2019

सीसा पिघलाने से फैल रहा जहरीला धुआं

18 jan 2019, page No.7


- एनजीटी ने डीपीसीसी से मांगी रिपोर्ट
- अस्पताल निर्माण के लिए ग्राउंड वाटर इस्तेमाल, होगी डीएम जांच

 बाहरी दिल्ली में सीसा पिघलाने का खतरनाक व्यवसाय किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान जहरीला धुआं उत्पन्न होता है जिससे आस-पास का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। मामले की शिकायत ई-मेल के जरिए एनजीटी से की की गई है। एनजीटी ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) से कार्रवाई कर रिपोर्ट मांगी है। मामले में अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।
दरअसल, एनजीटी से की गई शिकायत में बताया गया है कि बाहरी दिल्ली के कंझावला के पास पंजाब खोर गांव में सीसा पिघलाने का कारोबार किया जा रहा है। इसके कारण वातावरण में खतरनाक धुआं फैल रहा है जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसके चलते संक्रमण फैलने का भी डर बना हुआ है। अर्जी के जरिए इस खतरनाक कारोबर पर कार्रवाई की मांग की गई। जिस पर एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल अगुवाई वाली बेंच ने डीपीसीसी को कार्रवाई कर एक माह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। बेंच ने यह भी स्प्षट किया है कि मामले में किसी प्रकार की कोई कोताही न बरती जाए। अन्यथा एनजीटी एक्ट 2010 के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
बता दें कि सीसा एक विषैला धातु है। सीसा की चादरें, सिंक, सल्फ्यूरिक अम्ल निर्माण और कैल्सियम फास्फेट उर्वरक निर्माण में इस्तेमाल होता है। टेलीफोन केबल के ढकने में, बुलेट्स और पन्नियों के निर्माण में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं, सीसा चादरों का इस्तेमाल एक्स-रे और रेडियो ऐक्टिव किरणों से बचाव के लिए भी किया जाता है क्योंकि सीसा रेडिएशन शिल्डिंग भी कहा जाता है। सीसा और इसके उत्पाद मिट्टी और पानी को भी प्रदूषित कर देते हैं।


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पानी निकासी की होगी डीएम जांच
पीतमपुरा इलाके में एक अस्पताल के निर्माण के लिए भूमिगत जल का उपयोग किया जा रहा है। इस दौरान बड़ी मात्रा में पानी सर्विस रोड पर बहाया जा रहा है। दिल्ली जैसे शहर में बिना संबंधित एजेंसी से अनुमति लिए जमीन से पानी की निकासी अवैध है। उक्त तथ्यों के आधार पर मामले की शिकायत एनजीटी के की गई है। शिकायत पत्र के जरिए की गई है। इसे याचिका मानते हुए एनजीटी ने पूरे मामले में डीएम जांच के निर्देश जारी किए हैं। अब इस मामले की जांच नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रीक के डिस्ट्रीक मजिस्ट्रेट करेंगे। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल अगुवाई वाली बेंच ने नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रीक डीएम को जांच कर कानून के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने मामले की पूरी जानकारी और एक्शन टेकन रिपोर्ट भी तलब की है। इसके लिए एक माह का समय दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई अब 29 अप्रैल को होगी।


- राजेश रंजन सिंह
साभार: पंजाब केसरी

Tuesday, 15 January 2019

सील दुकानों के बाहर ही शुरू हुआ कारोबार

15 Jan 2019, Punjab Kesari


- नॉर्थ एमसीडी व डीपीसीसी को कार्रवाई करने का निर्देश
- ​बढ़ रहा वायु- ध्वनि प्रदूषण
- एनडीएमसी एरिया में अवैध तहबाजारी से बढ़ेगा प्रदूषण

एमसीडी कार्रवाई के नाम पर सीलिंग तो करती है लेकिन इसके बाद सील की गई जगह की कोई सुध नहीं ली जाती है। शायद यही वजह है कि सीलिंग होने के बाद भी सील की गई दुकानों के बाहर फिर से अवैध रूप से कब्जा कर लिया जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। पूरे मामले में एनजीटी नॉर्थ एमसीडी को कार्रवाई करने के लिए निर्देश जारी किया है। एनजीटी के समक्ष पेश एक मामले के अनुसार दिल्ली गेट इलाके में अतिक्रमण कर अवैध रूप से चलाए जा रहे स्कूटर रिपेयर मार्केट के कारण वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण फैल रहा है। इतना ही नहीं, इसके कारण इलाके में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और लोगों की शांति भी भंग हो रही है।
अर्जी में यह भी बताया गया है कि मार्केट की दुकानों को साल 2017 के दौरान सील भी किया गया था। लेकिन फिर से सील की गई दुकानों के बाहर ही रिपेयर का काम शुरू कर दिया गया। इन तथ्यों को पुख्त करने के लिए फोटोग्राफ भी दिखाए गए। उक्त आरोप रेजिडेंट्स एंड शॉपकीपर्स ऑफ दिल्ली गेट की ओर से पत्र भेजकर लगाए गए हैं। पत्र में लगाए गए आरोपों को एनजीटी ने अर्जी के तौर पर स्वीकारते हुए एजेंसियों को कार्रवाई के लिए निर्देश दिया है। एनजीटी ने नॉर्थ एमसीडी व डीपीसीसी को संयुक्त रूप से इस संबंध में एक माह के भीतर जांच कर कार्रवाई करने को कहा है। इसके लिए एनजीटी ने डीपीसीसी को नोडल एजेंसी बनाया है। मामले की सुनवाई एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस एसपी वांगडी, जस्टिस के रामाकृष्णण और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. नागिन नंदा की बेंच कर रही थी।

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एनडीएमसी एरिया में दी जा रही है अवैध तहबाजारी को मंजूरी
दिल्ली के पॉश एनडीएमसी एरिया में अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध तहबाजारी को मंजूरी दी जा रही है। इसके कारण लगभग एक हजार केरोसिन स्टोव का इस्तेमाल होगा। जिसके कारण प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ेगा। इन तथ्यों के आधार पर नई दिल्ली म्यूनिसिपल कोरपोरेशन इंप्लाएज एसोसियशन ने एनजीटी से शिकायत की है। एसोसियशन की ओर से एनजीटी को पत्र के जरिए दी गई शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि ऐसा एनडीएमसी के इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट की मिलीभगत से किया जा रहा है। पत्र द्वारा लगाए गए आरोपों को एनजीटी ने अर्जी के तौर पर स्वीकार किया है। एनजीटी चेयरपर्सन की अगुवाई वाली बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित डिस्ट्रीक मजिस्ट्रेट (डीएम) और डीपीसीसी को संयुक्त जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया है। इसके लिए एक माह का समय दिया गया है। एनजीटी ने शिकायत और ऑर्डर की एक कॉपी दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी को भी भेजने का निर्देश दिया है।

- राजेश रंजन सिंह
साभार: पंजाब केसरी

Monday, 14 January 2019

डीजल वाहनों से प्रदूषित हो रहा है प्रगति मैदान

14 Jan 2019, Punjab Kesari

ट्रैफिक पुलिस समेत अन्य एजेंसियों को जांच का निर्देश
आईटीपीओ में सीएनजी वाहन चलाने की ही है अनुमति


प्रगति मैदान में डीजल वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनका इस्तेमाल कोई बाहरी एजेंसी या आम लोग नहीं कर रहे बल्कि इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन  (आईटीपीओ) खुद कर रही है। जबकि प्रगति मैदान में सिर्फ सीएनजी वाहन ही चलाने की अनुमति है। बावजूद इसके नियमों की अनदेखी कर आईटीपीओ डीजल वाहन दौड़ाए जा रहे हैं। इस संबंध में एनजीटी ने संबंधित एजेंसियों को जांच कर कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया है।
दरअसल, एनजीटी को पत्र के माध्यम से शिकायत की गई कि प्रगति मैदान (आईटीपीओ) में प्रतिबंध के बाद भी डीजल वाहन चलाए जा रहे हैं। पत्र में यह आरोप भी लगाया गया कि ऐसा अधिकारियों और आईटीपीओ संचालकों द्वारा मिलीभगत के चलते किया जा रहा है। पत्र को अर्जी के तौर पर स्वीकृति देते हुए एनजीटी ने डीसीपी (हेड क्वार्टर), दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर और डीपीसीसी को संयुक्त जांच करने के लिए निर्देशित किया है। इस जांच के लिए डीपीसीसी को नोडल एजेंसी बनाया गया है। एजेंसियों को जांच कर कार्रवाई करने के लिए एनजीटी ने एक माह का समय दिया है। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली बेंच कर रही थी। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुपलान न होने पर एनजीटी एक्ट 2010 के तहत एजेंसियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

अवैध वेल्डिंग व्यवसाय की होगी जांच
एनजीटी ने बिना मंजूरी के चल रही सभी औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है। निर्देश डीपीसीसी को दिया गया है। एनजीटी ने यह निर्देश राजनगर, पालम के रिहायशी इलाकों में चल रही प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के संबंध में जारी किया है। एनजीटी चेयरपर्सन की अगुवाई वाली बेंच ने डीपीसीसी को इस ओर गंभीरता से ध्यान देने को कहा है। एनजीटी ने कहा कि रिहायशी इलाके में वेल्डिंग शॉप जैसी कई इकाइयां बिना उचित मंजूरी के चल रही हैं।

- राजेश रंजन सिंह
साभार: पंजाब केसरी

Sunday, 13 January 2019

प्रदूषित हो रहे संजय लेक को बचाए डीडीए

11 Jan 2019 Punjab Kesari


स्थिति सुधार कर एक माह में रिपोर्ट पेश करे डीडीए
त्रिलोकपुरी स्थित संजय लेक की स्थिति दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है। लगभग 1 किलोमीटर के एरिया में फैले इस लेक में सीवेज का पानी का गिरता है। जिसके कारण यह प्रदूषित होता जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव आसपास के वातावरण पर पड़ रह है। लिहाजा इस लेक को रिवाइव यानि पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम उठाए जाने की जरूरत है। इसी अपील के साथ एनजीटी को एक लेटर के जरिए जानकारी दी गई। इस लेटर के जरिए लगाए गए आरोपों को एनजीटी ने याचिका के तौर पर स्वीकृति देते हुए सुनवाई की।

प्रदूषित हो रहा लेक और वातावरण
इस संबंध में मामले की सुनवाई कर रही एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली बेंच ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डीडीए को एनजीटी ने संजय लेक को पुनर्जीवित करने के लिए एक माह का समय दिया है। एक माह के बाद इस संबंध में डीडीए से एनजीटी के समक्ष एक रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि बीके बंसल नाम के शख्स की ओर से एनजीटी को पोस्ट द्वारा एक लेटर भेजकर संजय लेक के प्रदूषित होने की जानकारी दी गई थी।
ईस्ट दिल्ली के त्रिलोकपुरी में स्थित संजय लेक बारिश के पानी से रिचार्ज होता है। लेकिन बीते कुछ सालों से इसमें सीवेज का गंदा पानी भी गिरता है। जिसके कारण इसकी स्थिति काफी बिगड़ चुकी है। इससे पहले भी कई बार लोकल एजेंसियों ने भी इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में काम किया लेकिन सफलता नहीं मिली। 

गिरते वाटर लेवल के लिए डीडीए जिम्मेदार
एनजीटी के समक्ष पहले भी कई मामलों में डीडीए को गिरते ग्राउंड वाटर के जिम्मेदार ठहराया जा चुका है। वाटर बॉडीज से ही संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा था कि दिल्ली के विकास ने ही दिल्ली का विनाश कर दिया है। इसमें सबसे अहम भूमिका डीडीए की रही है। डीडीए ने राजधानी के ग्राउंड वाटर लेवल (भूजल स्तर) को गिराने में कोई कसर ही नहीं छोड़ी। एनजीटी के समक्ष दी गई एक जानकारी के मुताबिक डीडीए ने लगभग 932 एकड़ के वाटर बॉडी एरिया का कमर्शियल तौर पर लैंडयूज ही बदल दिया और उन जगहों पर कंस्ट्रक्शन कराई गई जिसके फलस्वरूप वर्तमान में दिल्ली का ग्राउंड वाटर लेवल तेजी से नीचे जा रहा है। दिल्ली सरकार और निगमों ने इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह जानकारी एनजीटी में चल रहे वाटर बॉडीज के एक मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दी गई थी।

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बवाना इंडस्ट्रीयल एरिया में नहीं रूक रहा अवैध बोरवेल
अवैध बोरवेल और गिरते वाटर लेवल पर एनजीटी ने फिर से चिंता जाहिर की है। एक मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने अवैध बोरवेल और अवैध निर्माणों को लेकर डीपीसीसी को कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है। याचिककाकर्ता की ओर से एनजीटी के समक्ष जानकारी दी गई कि बाहरी दिल्ली के नरेला-बवाना इंडस्ट्रीयल एरिया में अवैध बोरवेल, अवैध निर्माण और कचरा भी जलाया जलाया जा रहा है लेकिन लोकल एसडीएम इन मामलों में कोई कार्रवाई ही नहीं कर रहे। बता दें कि गत वर्ष 13 जुलाई को एनजीटी ने निर्देश जारी किया था कि उसके अगले आदेश तक किसी भी प्रकार से ग्राउंड वाटर की निकासी न हो।


- राजेश रंज​न सिंह
साभार: पंजाब केसरी

Tuesday, 6 February 2018

ट्रकों के ओवरलोडिंग, सरकार से NGT ने मांगी रिपोर्ट


दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, दिल्ली राज्य सिविल आपूर्ति निगम लिमिटेड को जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय
याचिकाकर्ता की दलील, भारी वाहनों के ओवर​लोडिंग से बढ़ता है प्रदूषण का स्तर 


ट्रकों के ओवरलोडिंग मामले में एनजीटी ने दिल्ली सरकार को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश जारी किया है। साथ ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, दिल्ली राज्य सिविल आपूर्ति निगम लिमिटेड एवं अन्य को भी रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। यह निर्देश जस्टिस एसपी वांगडी (ज्यूडिशियल मेंबर) और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. सत्यावान सिंह गरब्याल की बेंच ने जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई आगामी 20 फरवरी को होगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए याचिककर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने बताया कि दिल्ली से बाहर पंजीकृत 10 साल पुराने ओवरलोडेड ट्रकों को स्थानीय जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों में खाद्यान्न की आपूर्ति करने से रोकने के निर्देश देने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की गई थी। इसमें याचिककर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि भारी वाहनों के ओवरलोडिंग की वजह से प्रदूषण भी बढ़ता है। गत वर्ष दाखिल की गई इस याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के तत्कालनी चेयरपर्सन जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और दिल्ली सरकार, दिल्ली राज्य सिविल आपूर्ति निगम लिमिटेड एवं अन्य को नोटिस जारी किया था। इस पर एफसीआई ने अपना पक्ष एनजीटी के समक्ष पेश कर दिया था। लेकिन बाकी पक्षों ने अपना पक्ष नहीं रखा था। इसी मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को एक बार फिर से मामले दिल्ली सरकार व दूसरे पक्षों को रिपोर्ट पेश करने का समय दिया गया है।

Tuesday, 30 January 2018

जनकपुरी इलाके में चल रही हैं अवैध तौर पर डाइंग फैक्ट्रियां

20 फरवरी को होगी सुनवाई
जनकपुरी इलाके में अवैध तौर पर डाइंग की फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं। आवायी क्षेत्रों में चलाए जा रहे ऐसे उद्योगों पर पाबंदी को लेकर एक आरडब्ल्यूए ने एनजीटी ने गुहार लगाई है। चाणक्य प्लेस रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसियशन ने एनजीटी के समक्ष याचिका दाखिल कर इन फैक्ट्रियों को बंद कराने की मांग की है। अब इस मामले में 20 फरवरी को सुनवाई होगी।
बता दें कि चाणक्य प्लेस रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसियशन ने जनकपुरी, सीतापुरी, और दूसरी आरडब्ल्यूए के साथ मिलकर एनजीटी में गत वर्ष ही याचिका दाखिल की। इस याचिका में एसोसियसन की ओर से जानकारी दी गई कि जनकपुरी, सीतापुरी, और दूसरी कॉलोनियों में अवैध तौर पर बेरोक-टोक तरीके से डाइ करने की फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं। इस बाबत आरडब्ल्यूए ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस संबंध में शिकायत दी लेकिन कहीं से भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हालांकि ऐसे ही एक मामले एनजीटी ने गत वर्ष जुलाई माह के दौरान अवैध तौर पर चल रहे उद्योगों की लिस्ट तलब की थी। एनजीटी ने उन उद्योगों की भी लिस्ट मांगी थी जो बिना अनुमति धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं और वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान याचिककर्ता की ओर से स्पष्ट तौर पर जानकारी दी गई थी कि अधिकारी प्रदूषण फैलाने वाली व अवैध तौैर पर चलने वाली फैक्ट्रियों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) व नॉर्थ एमसीडी को ज्वाइंट इंस्पेक्शन कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश जारी किया था। नॉर्थ एमसीडी के तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर ने भी निगम की हाउस की बैठक में बताया था कि इन पर कार्रवाई करने का अधिकार निगम के क्षेत्राधिकार में ही आता है।

Tuesday, 23 January 2018

नांगलोई में लेदर की जगह चल रहा है प्लास्टिक का धंधा


एनजीटी ने दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
डीएसआईआईडीसी, डीपीसीसी व नॉर्थ एमसीडी को देनी होगी रिपोर्ट 


नांगलोई इलाके में  लेदर उद्योग के लिए अलॉटेड जगह पर प्लास्टिक का कारोबार चल रहा है। इसके कारण पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हो रहा है। इस मामले को लेकर एनजीटी ने डीएसआईआईडीसी को नोटिस जारी जवाब मांगा है। साथ ही नॉर्थ एमसीडी व दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) को भी इस मामले में जवाब पेश करने का निर्देश एनजीटी ने जारी किया है। सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है।
NGT FILE PHOTO
एनजीटी के एक्टिंग चेयरपर्सन जस्टिस यूडी साल्वी व एक्सपर्ट मेंबर डॉ. नागिन नंदा की बेंच ने यह आदेश जारी किया है। दरअसल, एनजीटी के समक्ष एक याचिका दायर की गई थी जिसमें याचिककर्ता ने आरोप लगाया था कि नांगलोई नंबर-2 इलाके में  लेदर उद्योग के लिए अलॉटेड जगह पर  अब प्लास्टिक का धंधा चल रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि इस क्षेत्र में प्लास्टिक ढुलाई करके प्लास्टिक से गुल्ला व भ_ियां चलाई रही हैं जिससे बच्चों व बुजुर्गों की सेहत से भारी खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे पूरे इलाके में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा है।
एनजीटी में दाखिल याचिका में याचिककर्ता ने कहा है कि नांगलोई नंबर-2 इलाके में  लेदर उद्योगों के लिए बड़ी संख्या में वर्क सैंटर बनाए गए थे जिनका निर्माण डीएसआईआईडीसी ने किया था। लेकिन बाद में निगम और दूसरी एजेंसियों की की मिलीभगत का फायदा उठाकर इन छोटे वर्क सैंटरों को मिलाकर बड़े शेडों में तब्दील कर दिया गया। इन्हीं शेडों में अब प्लास्टिक ढ़ुलाई का कारोबार किया जा रहा है। इस दौरान पूरा क्षेत्र प्रदूषण की चपेट में आ जाता है।

-राजेश रंजन सिंह
साभार: पंजाब केसरी